बैंकों में नोट बदलने के लिए लोग दिहाड़ी मजदूरों को लगा रहे हैं। इन मजदूरों को रुपये बदलने के बदले ढाई सौ से पांच सौ रुपये तक दिए जा रहे हैं। बेरोजगारों को भी यह धंधा भा रहा है। सुबह से ही बेरोजगार बैंकों के बाहर लाइनों में लग जाते हैं। चार दिनों से बैंकों के बाहर लाइन लगाए युवकों पर जब नजर दौड़ाई तो इनमें कई युवक व युवतियां लगातार बैंकों के सामने लाइनों में लगी मिलीं।
जब इनसे पूछा गया तो उनका जवाब था कि बैंक सिर्फ चार हजार दे रही है, जबकि उनके परिवार के पास पचास हजार के बड़े नोट हैं। इसी वजह से उनको प्रतिदिन लाइन में लगना पड़ता है। जब यह सवाल पूछा कि खातों में क्यों नहीं जमा कर रहे हैं तो उनका जवाब था कि उनके खाते बैंक में नहीं हैं।
वहीं, कन्नौज, तिर्वा, छिबरामऊ, गुरसहायगंज, सौरिख आदि बड़े कस्बों में बैंकों के बाहर लगी भीड़ में कोई बड़ा कारोबारी नहीं दिखाई पड़ा। सूत्रों के मुताबिक बड़े कारोबारी रात में बैंक अधिकारियों से नोट बदलवा रहे हैं। एलडीएम परमाल सिंह का कहना था कि कई दिनों से छोटे नोटों के आने की दिक्कतों में उलझे थे। इन तमाम मामलों को दिखाया जाएगा। यदि कोई दोषी मिला तो कार्रवाई की जाएगी।