अस्पताल में पुलिस से विवाद करते ग्रामीण।
छिबरामऊ। सौ शैया अस्पताल में भर्ती मरीज की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने गलत इलाज का आरोप लगाकर हंगामा किया। गांव नजदीक होने के कारण 100 से अधिक ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए। ग्रामीणों ने डॉक्टर समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के साथ गाली गलौज कर हंगामा किया। पुलिस के समझाने पर ग्रामीण शांत हुए। इसके बाद मरीज को इलाज के लिए निजी अस्पताल में ले गए।
ग्राम दिलू नगला निवासी रमाकांत ने बेटी रिया यादव के पेट में दर्द की शिकायत पर मंगलवार सुबह 10:40 बजे कुछ ही दूरी पर स्थित सौ शैया अस्पताल में भर्ती कराया था। डोज लगने के बाद वह बेटी को घर ले गए और रात करीब 8 बजे दोबारा डोज लगवाने के लिए अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया। डाॅ. हसीब खां की देखरेख में कर्मियों ने इलाज शुरू किया।
कुछ देर बाद रिया के साथ आए परिजनों ने सर्दी लगने व उल्टी शुरू होने की शिकायत की। तभी रिया बेहोश हो गई। परिजनों ने डॉक्टर, स्टाफ नर्स समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों पर गलत इलाज का आरोप लगाकर हंगामा करने लगे। इसी बीच कई ग्रामीण अस्पताल पहुंचे और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ गाली गलौज करने लगे। सूचना पर 112 पुलिस, सौ शैया चौकी इंचार्ज राम मनोज द्विवेदी टीम के साथ पहुंच गए। ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ ने एक नहीं सुनी। तब कोतवाली से अतिरिक्त फोर्स बुलवाया गया। इसके बाद ग्रामीण शांत हुए। परिजन रिया को निजी अस्पताल में इलाज के लिए रेफर कराकर ले गए।
दूसरे दिन भी ड्यूटी पर नहीं पहुंची स्टाफ नर्स
मंगलवार रात ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स प्रियंका कटियार के साथ रिया के साथ आई युवती और ग्रामीणों ने अभद्रता की। स्वास्थ्य कर्मियों की मानें तो खौफजदा नर्स ड्यूटी छोड़कर आवास पर चली गई। ग्रामीणों ने वहां पहुंचकर अभद्रता की और दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया। इससे स्टॉफ नर्स बुधवार को ड्यूटी पर नहीं पहुंची। साथी कर्मियों ने जानकारी की तो पता चला कि नर्स आवास में ताला डालकर घर चली गई हैं।
स्टाफ नर्स ने फेंक कर मारी बोतल
मरीज रिया के साथ आई युवती का आरोप है कि स्टाफ नर्स बेड पर लिटाकर ड्रिप लगाने की बजाय काउंटर पर ही ड्रिप लगा रही थीं। मना करने पर स्टॉफ नर्स ने बोतल फेंक कर मारी और बोलीं, जाओ लिटाकर मरीज को पिला दो जाकर। स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के कारण मरीज की हालत बिगड़ने से वह बेहोश हो गई। वहीं, डाॅ. हसीब का कहना है कि ड्रिप लगने के दौरान यह लोग मरीज को सीधा लिटाए थे। इससे उल्टियां महसूस हो रही थीं। शिकायत पर उन्होंने मरीज को सही लिटाया। उल्टी के बाद मरीज को कुछ भी खाने या पीने को देने के लिए मना किया गया। इसके बाद भी उसे पानी पिला दिया। गलत इलाज व अभद्रता का आरोप बेबुनियाद है।