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Kannauj News: वीर बाला प्रीति को मिला आशियाना, सौंपा आवंटन पत्र

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छिबरामऊ। मां के सिरफिरे आशिक ने 19 सितंबर को तमंचे की दम पर भाई-बहन को कमरे में बंधक बना लिया था। पहले वीर बेटी प्रीति ने हौंसला दिखाते हुए युवक की चंगुल से छूटकर अपनी जान बचाई थी। इसके बाद आसपास के लोगों व पुलिस को सूचना देकर भाई प्रियांशु को भी आशिक युवक की पकड़ से सुरक्षित निकलवाया था। अफसरों ने मंगलवार को प्रीति के सम्मान समारोह के दौरान किए गए वादे को पूरा करते हुए किराए के आशियाने को उसके नाम दर्ज करवाते हुए आवंटन पत्र सौंपा।
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एसडीएम ज्ञानेंद्र कुमार द्विवेदी व सीओ सुरेश मलिक ने कांशीराम काॅलोनी पहुंचकर प्रीति को आवास आवंटन का स्वीकृति पत्र सौंपा। एसडीएम ने बताया कि प्रीति के नाम पर आवास आवंटित किया गया है। उसके बालिग होने तक उसके बड़े भाई देव को संरक्षक बनाया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक प्रीति, देव और प्रियांशु कांशीराम काॅलोनी में किराए पर आवास लेकर रह रहे थे, जो अनिल कुमार के नाम था। काॅलोनी को किराए पर उठाना असंवैधानिक है। तब अनिल का आवंटन निरस्त कराकर प्रीति के नाम पर स्वीकृत करा दिया गया है। साथ ही दोनों भाई-बहन के बालिग होने तक तहसील प्रशासन की ओर से हर संभव मदद की जाएगी।


ये था मामला...

तालग्राम क्षेत्र के ग्राम सलेमपुर निवासी दीपू चक ने कांशीराम काॅलोनी में रहने वाले तीन बच्चों की मां से कोर्ट मैरिज की थी। बच्चों को छोड़कर मां उसके साथ अहमदाबाद चली गई थी। कुछ दिन बाद महिला दीपू को छोड़कर कहीं चली गई। 19 सितंबर को दीपू ने काॅलोनी आकर महिला के दोनों बच्चों को आवास में तमंचे के बल पर बंधक बना लिया था। बेटी दीपू का चकमा देकर बाहर निकल आई थी। आठ घंटे तक चले हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद पुलिस ने बच्चे को बंधक मुक्त कराया था।
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