कन्नौज। एक साल बाद जिला पंचायत की बैठक में सदस्यों ने अनदेखी का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को जमकर हंगामा किया। हंगामे के चलते बैठक आधे घंटे में सिमट गई। इस दौरान केवल छह सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए और शिकायतें कीं। कई सदस्य बोलना चाहते थे, लेकिन सबकुछ इतनी जल्दी में निपटाया गया कि उन्हें मौका ही नहीं मिल सका। सदस्यों का कहना था कि उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। जिन ठेकेदारों को ब्लैक लिस्टेड कर उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, उन्हें खूब पेमेंट किए गए। आय बढ़ाने वाले प्रस्तावों को एजेंडे में तो शामिल किया जाता है पर विचार नहीं किया जाता है। उधर,हंगामे के बीच 71 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पास किए गए।
विकास भवन स्थित हर्षवर्धन सभागार में जिला पंचायत की बैठक में सबसे पहले अपर मुख्य अधिकारी विद्याशंकर पांडेय ने पिछली बैठक का एजेंडा पढ़कर सुनाया। इस पर सदस्यों ने मेज थपथपाकर विरोध करना शुरू कर दिया। सदस्यों का कहना था कि एजेंडा बना लिया जाता है पर विचार नहीं किया जाता। सदस्यों के प्रस्तावों पर निष्पक्ष तरीके से विचार नहीं किया जाता। इस कारण कई क्षेत्र पांच साल बीतने के बाद भी विकास से अछूते रह गए। सदस्यों द्वारा निर्माण कार्यों में धांधली व मानक की अनदेखी संबंधी शिकायतों पर कोई विचार नहीं किया गया। बल्कि जिन ठेकेदारों की जांच कर भुगतान रोकने, ब्लैक लिस्टेड करने व जेल में डाला जाना चाहिए, उन्हें खुलेआम भुगतान किया गया। सदस्यों द्वारा की गई शिकायतों को नजरंदाज किया गया।
बैठक में कृषि विभाग व लोक निर्माण विभाग के प्रतिनिधि नहीं आए। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष प्रिया शाक्य, छिबरामऊ विधायक अर्चना पांडेय, तिर्वा विधायक कैलाश राजपूत, मुख्य विकास अधिकारी रामकृपाल चौधरी, जिला विकास अधिकारी नरेंद्रदेव, डीपीआरओ राजेंद्र प्रकाश, जिला महामंत्री शैलेंद्र द्विवेदी, समाज कल्याण अधिकारी वेदप्रकाश मिश्र मौजूद रहे।
ये सदस्य हुए शामिल
बैठक में जिला पंचायत सदस्य लालसिंह, कीर्ति देवी, शिवाजी, शीनू पाल, जीतेंद्र कुमार, संगीता देवी, सीता देवी, नीलम यादव, जुबैरिया शाह, आरती देवी, मिथलेश, अनुपम यादव, प्रमोद राजपूत, कुसमा देवी, नीरज देवी, नीलेश, भूपेंद्र सिंह, दिनेश सिंह, अजय कुमार, दिगंबर सिंह, अमिता उर्फ नेहा, श्याम सिंह यादव, प्रेमा देवी, राजीव प्रताप, इंद्रेश यादव, शिल्पी व सरोजनी शामिल रहीं।
कई नामित अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी नहीं हुए शामिल
बैठक में आगरा स्नातक खंड विधान परिषद सदस्य मानवेंद्र सिंह, फर्रुखाबाद, कन्नौज विधान परिषद सदस्य प्रांशुदत्त द्विवेदी, आगरा शिक्षक खंड विधान परिषद सदस्य आकाश अग्रवाल, आयुक्त कानपुर मंडल व जिलाधिकारी नजर नहीं आए जबकि बैठक की कार्यसूची में यह नाम प्रमुखता से दिए गए हैं।
छह महीने में सड़क 80 फीसदी टूटी
उमर्दा क्षेत्र के बहोसी निवासी वार्ड नंबर 26 के सदस्य इंद्रेश यादव ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में शिकायतों व आरोप-प्रत्यारोप के बाद पांच साल में मात्र तीन सड़कें बन सकीं। दो सड़कें छह महीने भी नहीं चलीं और टूट गईं। उन्होंने ठेकेदार की धरोहर राशि जब्त करने की मांग की। इसके अलावा खैरनगर-सुखी मार्ग पर स्थित कन्हईपुर्वा में 80 मीटर सड़क पर मात्र एक इंच ढलाई की गई। नाला निर्माण में केवल डस्ट का प्रयोग किया गया। एएमई व कमिश्नर को पत्र लिखकर शिकायत की, जिसे तोड़कर दोबारा बनाने का आदेश हुआ, लेकिन बिना सुधार के भुगतान कर दिया गया। इसके अलावा अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच के लिए कई बार शिकायतें की गईं पर संज्ञान नहीं लिया गया।
मेरे क्षेत्र की अनदेखी हुई, विकास शून्य
हसेन के चपुन्ना निवासी वार्ड नंबर वार्ड 22 की सदस्य अमिता उर्फ नेहा त्रिपाठी ने कहा कि मेरे प्रस्ताव सूची के अंत में डाल दिए गए। जिला पंचायत द्वारा लगाई गई एक भी लाइट नहीं जली, बार-बार शिकायत के बाद सुनवाई नहीं हुई। नाला, सड़क निर्माण के कार्य नहीं हुए। ग्राम प्रधान को प्राथमिकता दी जा रही है। मेरे क्षेत्र में कार्य शून्य के बराबर हुए, क्षेत्र का विकास कैसे होगा।
आईजीआरएस में केवल खानापूरी
इंदरगढ़ क्षेत्र के पूराराय निवासी वार्ड नंबर 21 के सदस्य दिगंबर सिंह ने कहा कि आईजीआरएस प्रकरणों में केवल खानापूरी की गई है। जिला पंचायत की आय बढ़ाने के लिए दिए गए सुझावों पर कोई विचार नहीं किया गया। यह बहुत ही निंदनीय बात है कि एजेंडे में लिखा जाता है, लेकिन उस पर विचार नहीं किया जाता है। इस पर विधायक अर्चना पांडेय ने कहा कि इसकी शिकायत बोर्ड में आनी चाहिए।
किसानों ने ब्लैक में खाद खरीरी
उमर्दा के सिकरोरी निवासी वार्ड नंबर 23 के सदस्य श्यामसिंह यादव ने किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों ने खेतों में खाद डाली पर ब्लैक में खरीदी। यूरिया 266 की 350 रुपये में खरीदी। बीजों की डुप्लीकेसी भी नहीं रोकी जा सकी, इससे किसान ठगे जा रहे हैं। उन्होंने कृषि विभाग पर आरोप लगाते हुए कि लाइसेंस नवीनीकरण का शुल्क 1350 रुपये है, जिसकी जगह 20 से 25 हजार वसूल किए जाते हैं, इसलिए दुकानदार भी ब्लैक में माल बेचते हैं। इस पर सीडीओ ने कहा कि जब जानकारी होती है तो कार्रवाई की जाती है, कुछ दिन पूर्व ही तिर्वा में फर्जी पोटाश पकड़ा गया है।