पूर्वी बाईपास स्थित संत निरंकारी भवन में आयोजित
सत्संग में महात्मा राकेश राठौर ने कहा कि सच्चे भक्त को प्रभु से कुछ
मांगने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि उसे तो प्रभु बिना मांगे ही सब कुछ दे
देते हैं।
उन्होंने कहा कि सच्चे मन से की गई भक्ति से प्रभु प्रसन्न
रहते हैं और कोई कष्ट नहीं होने देते, पर भक्त के मन में छल कपट है, तो
उसके जीवन में कभी खुशी नहीं आ सकती। वह जीवन भर दुखी रहता है। सुदामा जैसा
सच्चा प्रेम हो तो प्रभु भक्त के भी चरण धोते हैं और स्वाभिमान की रक्षा
करते हैं।
उन्होंने श्रीकृष्ण सुदामा सत्संग की कथा का विस्तार से वर्णन
करते हुए कहा कि प्रभु सबके मन की बात जानते हैं। अपने मित्र के प्रेम और
स्वाभिमान की रक्षा करते हुए श्रीकृष्ण ने न सिर्फ सुदामा के चरण धोए,
बल्कि अपने समान धन संपत्ति का स्वामी भी बना दिया। महात्मा राजकुमार
गुप्ता के संचालन में हुए कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी विचार रखे।