कन्नौज। विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट एवं अपर सत्र न्यायाधीश ने नाबालिग के अपहरण मामले में बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपियों को अपहरण के तहत दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। हालांकि, पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में युवक को दुष्कर्म, विवाह के लिए मजबूर करने और पॉक्सो एक्ट के गंभीर आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
पीड़िता के पिता ने 21 अप्रैल 2024 को तालग्राम थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उनकी 13 वर्षीय बेटी 15 अप्रैल को संदिग्ध परिस्थितियों में घर से लापता हो गई थी। पुलिस ने किशोरी को सकुशल पकड़ लिया। मामले की तफ्तीश के दौरान कोतवाली गुरसहायगंज के ग्राम मीरपुर निवासी राहुल और तालग्राम थाना क्षेत्र के ग्राम रसूलाबाद निवासी कंचन का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने दोनों पर कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयानों ने केस की दिशा बदल दी। जिरह के दौरान पीड़िता ने स्पष्ट किया कि राहुल ने उसके साथ कोई गलत काम या जबरदस्ती नहीं की थी। वहीं, मेडिकल रिपोर्ट में भी लैंगिक हमले की पुष्टि नहीं हुई। इन परिस्थितियों को देखते हुए अभियोजन पक्ष राहुल के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के आरोप संदेह से परे सिद्ध करने में नाकाम रहा, जिसके चलते कोर्ट ने उसे इन धाराओं से बरी कर दिया।
गंभीर धाराओं से राहत मिलने के बावजूद आरोपी कानून की गिरफ्त से पूरी तरह नहीं बच सके। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए कानूनी संरक्षक (माता-पिता) की सहमति के बिना उसे साथ ले जाना अपहरण का स्पष्ट अपराध है। इसी आधार पर राहुल और कंचन दोनों को दोषी करार दिया गया। कोर्ट दोनों दोषियों को तीन-तीन साल की कैद और 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना न भरने पर दो महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वसूल की जाने वाली 40 हजार रुपये की जुर्माना राशि पीड़िता के इलाज और पुनर्वास के लिए दी जाएगी। फैसला आते ही कोर्ट ने दोनों दोषियों की जमानत निरस्त कर उन्हें हिरासत में ले लिया और जिला कारागार भेज दिया।