बिजली गुल रहने से सिंचाई संकट झेल रहे तमाम किसानों ने धावा बोलकर राजकीय नलकूप पर कब्जा जमा लिया, फिर ट्रैक्टर के सहारे अलटीनेटर लगाकर नलकूप चालू किया और फसलों की सिंचाई शुरू कर दी। इस दौरान अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। गुस्से से भरी तमाम महिलाओं ने भी प्रदर्शनकारी किसानों का साथ दिया और विरोध कर रहे नलकूप आपरेटर को खदेड़ दिया। फिलहाल अधिकारी भी किसानों के इस काम में कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं।
तालग्राम क्षेत्र के कई गांवों में 21 दिन से बिजली गुल है। इससे सिंचाई संकट पैदा हो गया है। इन गांवों को बहबलपुर उपकेंद्र से बिजली मिलती है। यहां लगा पांच एमवीए का ट्रांसफार्मर फरवरी के दूसरे सप्ताह में फुंक गया। इससे गांव पलिया, त्योर, बेहटा, तिलकापुर, मधईनगला, खाननगला, दुर्गा नगला, मछरिया, तिजू नगला समेत 40 गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। सरकारी व निजी नलकूप भी बंद हो गए। इससे किसानों की गेहूं व मक्के की फसल सूखने लगी। मंगलवार को सैकड़ों किसानों ने तहसील दिवस में शिकायत की, विद्युत उपकेंद्र पर प्रदर्शन भी किया, पर अफसर नहीं जागे।
बुधवार सुबह दर्जनों किसानों और महिलाओं ने ग्रामसभा त्योर के मजरा मछरिया गांव के समीप लगे राजकीय नलकूप संख्या 146 पर कब्जा जमा लिया। चंदा करके गांव के मुकेश का ट्रैक्टर किराए पर लिया और अलटीनेटर के सहारे नलकूप की लाइन जोड़ ली। आपरेटर राजाराम ने रोकना चाहा तो कांती, रानी, रश्मि, रामवती, नन्हीं, रेखा, विमला आदि महिलाओं ने उसे खदेड़ दिया।
नलकूप के आपरेटर राजाराम ने बताया कि उन्होंने ट्रैक्टर से ट्यूबवेल चलाकर खेत सींचने की जानकारी विभागीय अधिकारियों को दे दी है। ग्रामीणों को रोक पाना उसके वश की बात नहीं है। ग्रामीण पवन, मुन्ना आदि ने बताया कि बिजली विभाग के जेई अवनीश कुमार ने कहा था कि दो महीने तक बिजली आपूर्ति नहीं मिल पाएगी, इसलिए मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा। इस बाबत एसडीओ सुधांशु श्रीवास्तव का कहना है कि इन गांवों को बिजली मिलने में कम से कम एक सप्ताह का समय और लगेगा।