विकास भवन में ग्रामीण पेयजल स्वच्छता सप्ताह की गोष्ठी आयोजित हुई। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने जल निगम से कराए जा रहे कार्यो की जमकर खिंचाई की। जल निगम के अधिशाषी अभियंता राजेंद्र सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता के लिए पाइप पेयजल योजना शुरू की गई है।
2022 तक जिले की 90 प्रतिशत आबादी को पाइप पेयजल योजना से जोड़ने का लक्ष्य है। कहा कि नए शासनादेश के तहत नए हैंडपंपों के अधिष्ठापन में गिरावट लाना है। नए हैंडपंप के लिए बजट नहीं मिल रहा है। कहा कि जिले में 33 पाइप पेयजल योजनाएं निर्मित कराई जा रही है। ग्रामीणों को जागरुक करने के लिए पेयजल स्वच्छता समिति के माध्यम से बैठकें आयोजित कराई जाएंगी।
जिला पंचायत सदस्य पति श्याम सिंह यादव, ब्लाक प्रमुख दिगंबर सिंह यादव ने कहा कि पाइप पेयजल योजनाओं में पानी की बर्बादी अधिक हो रही है। टोटियां खुली रहती हैं। अधिशाषी अभियंता ने कहा कि कई बार टोटियां लगवाई गई, लेकिन निकाल दी जाती हैं। अलमापुर में लोकल कंपनी के पाइप डालने की शिकायत रखी गई।
ब्लाक प्रमुख ने कहा कि पाइप लाइन डालने के दौरान ठेकेदार सड़कों को उखाड़कर फेंक देते हैं, जो कि बाद में सही नहीं की जाती हैं। अधिशाषी अभियंता ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट में काफी संख्या में गांव ऐसे आए हैं, जहां लगे हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है। इस पर जनप्रतिनिधियों ने कहा कि उन हैंडपंपों के हत्थे खुलवा दिए जाए।
नादेमऊ तिराहे व उमर्दा विकास खंड के गांव अनंदीपुर्वा सहित कई हैंडपंपों के हत्थे खुलवाए जाने की मांग की गई। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल ने कहा कि ठेकेदार व जेई की मिलीभगत से बंदरवाट चल रहा है। जल निगम विभाग से भेजे गए सभी प्रस्ताव पास हो रहे हैं, लेकिन मानकों का ध्यान नहीं रखा जाता है। अधिशाषी अभियंता ने कहा कि दो जेई व दो ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जा चुकी है।