कन्नौज। अगर आप इत्रनगरी से तिर्वा जाने का मन बना रहे हैं, तो जरा संभल कर जाएं। यह कोई आम ग्रामीण सड़क नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग 234 है, जो इत्रनगरी को झांसी और मध्य प्रदेश से जोड़ता है। इस हाईवे का नजारा देखकर आप सोच में पड़ जाएंगे कि यह वाकई नेशनल हाईवे है सड़क में एक फीट गहरे गड्ढे हैं, जिनसे प्रतिदिन हादसे हो रहे हैं।
कन्नौज से तिर्वा के बीच का महज 16 किलोमीटर का सफर इन दिनों वाहन चालकों के लिए किसी दुस्वप्न जैसा बन गया है। पूरी सड़क पर सैकड़ों छोटे-बड़े गड्ढे इस कदर पसरे हैं मानो हादसे खुलेआम दावत दे रहे हों। इस खस्ताहाल हाईवे की सबसे भयावह तस्वीर सामने आती है नजरापुर पट्टी गांव के पास। आलम यह है कि अकेले इस एक गांव की सीमा के भीतर सड़क पर 100 से अधिक गड्ढे बने हुए हैं। नजरापुर पट्टी के शरीफ, प्रतीक मिश्रा, गौरव दुबे आदि का कहना है कि यहां अक्सर दोपहिया सवार अनियंत्रित होकर गिरते हैं और गंभीर रूप से चुटहिल होते हैं। ग्रामीणों ने गड्ढों के बाहर ईंटें लगा दीं, जिससे कि कोई वाहन उसमें न फंसे।
नेताओं और अफसरों का काफिला गुजरता हैपर सुध नहीं
विडंबना यह है कि यह मार्ग केवल आम जनता के आवागमन का जरिया नहीं है। राजनेताओं, प्रदेश सरकार के मंत्रियों और जिले के आला अधिकारियों के लग्जरी वाहनों का काफिला भी रोजाना इसी सड़क से होकर गुजरता है। सायरन बजाते हुए गाड़ियां गड्ढों को बचाते-बचाते निकल जाती हैं पर जनप्रतिनिधि या अफसर की नजर इस जानलेवा समस्या पर नहीं ठहरती। जनता का कहना है कि चुनावी भाषणों में तो विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, पर जमीनी हकीकत इन गड्ढों में दम तोड़ती नजर आती है।
इत्रनगरी की व्यापारिक रफ्तार पर ब्रेक
एनएच 234 इत्र उद्योग और स्थानीय व्यापार के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। झांसी और मध्य प्रदेश के साथ माल ढुलाई और व्यापारिक आवाजाही का मुख्य जरिया यही रास्ता है। लेकिन सड़क की इस दयनीय हालत के कारण न सिर्फ वाहनों का ईंधन और समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि व्यापारियों की आवाजाही पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। विश्वस्तरीय इत्र पार्क जाने के लिए भी यही सड़क है, जो लोगों को दर्द दे रही है।
वर्जन
नेशनल हाईवे 234 के नवीनीकरण के लिए 48 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो गया है। टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही नवीनीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा। इस बार रोड को और बेहतर तकनीक से बनाया जाएगा, जिससे कि हादसे न हों।
-योगेश कुमार जैन, अधिशासी अभियंता- एनएच कानपुर डिवीजन