देश की सबसे छोटी संसद के रूप में विकास खंड छिबरामऊ
में अबकी पढ़े-लिखों की सरकार का गठन होने वाला है। चुनाव नतीजों के बाद
छोटी संसद की जो तस्वीर उभर कर सामने आई है, उसके तहत निर्वाचित हुए 96
ग्राम प्रधानों में अबकी स्नातक और परास्नातक डिग्रीधारकों का दबदबा रहा
है।
राजनीति में अब पढ़े-लिखों ने भी अपनी भागेदारी बढ़ानी शुरू कर
दी है। उसी का परिणाम है कि गांव की छोटी संसद के महत्वपूर्ण चुनाव में इस
बार ज्यादातर पढ़े-लिखों ने भागेदारी की। विकास खंड क्षेत्र में ग्राम
प्रधान के 96 पद हैं। इसमें आठ सीटों पर परास्नातक डिग्रीधारकों ने प्रधान
पद पर जीत हासिल की।
12 सीटों पर स्नातक योग्यता वाले प्रत्याशियों
को लोगों ने जीत का मौका दिया। इसके अलावा इंटर पास 11, हाईस्कूल उत्तीर्ण
29, उच्च प्राथमिक स्तर पर 16 और प्रायमरी पास 18 प्रत्याशी इस बार प्रधान
पद पर जीतकर आए हैं। ग्राम पंचायत सदरपुर द्वारिकापुर से जहां डाक्टर
चंद्रकांत यादव ने जीत हासिल की, वहीं ग्राम पंचायत बेहटा खास से बार
एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रहे महेंद्र प्रताप सिंह सेंगर एडवोकेट,
कूंदेपुर से जितेंद्र शाक्य एडवोकेट और असालताबाद से विनोद यादव एडवोकेट ने
भी जीत का परचम फहराया है।
ऐसे में इस बार की छोटी संसद
पढ़े-लिखों की सरकार में सुमार होगी। उधर, विकास खंड में बेशक इस बार
ज्यादातर पढ़े-लिखे लोगों को प्रधान पद पर चुना गया हो, पर तीन ग्राम
पंचायतों से अंगूठा टेक प्रत्याशी जीत हासिल कर छोटी संसद का कार्यभार
देखेंगे।
एक ओर भले ही देश को हाईटेक बनाकर सब कुछ ऑनलाइन करने का
सपना संजोया जा रहा हो, वहीं दूसरी ओर अभी भी निरक्षरता हावी है। निरक्षरों
के साक्षर करने के लिए भारत सरकार ने तमाम प्रयास किए। साक्षरता अभियान
चलाए। इसके बावजूद यह अभिशाप अभी पूरी तरह धुल नहीं पाया।
विकास खंड
क्षेत्र की ग्राम पंचायत हमीरपुर से अनारकली, बिबियाजलालपुर से गोविंद और
ग्राम पंचायत भोजपुर निगोह से कलावती निरक्षर होने के नाते अंगूठा टेक हैं।
इन तीनों प्रत्याशियों ने जीत का प्रमाणपत्र जीते समय निर्वाचन प्रपत्रों
पर हस्ताक्षर के स्थान पर अपने अंगूठे लगाए।