श्रम विभाग व विकास विभाग की ओर से मनरेगा मजदूरों का
पंजीकरण कराने को लगाए गए कैंप फ्लाप शो साबित हुए। सदर विकास खंड में 49
श्रमिकों का पंजीकरण हो सका, वहीं तिर्वा में 77 श्रमिकों का ही पंजीकरण
कराया जा सका।
अफसरों के निर्देश के बावजूद ब्लाकों में अधिकारी व
कर्मचारी कोरम पूरा करते नजर आए। सदर विकास खंड में लगाए गए कैंप में 425
और तिर्वा में 1542 श्रमिकों का चिन्हीकरण किया गया था। ये लोग 50 दिन काम
कर चुके हैं। सदर ब्लाक में श्रम विभाग की ओर से श्रम प्रवर्तन अधिकारी
गुरसहायगंज पंचेश्वरी व वरिष्ठ लिपिक देवेंद्र सिंह को लगाया गया।
वहीं
तिर्वा में सर्वेश कुमार व अजय कुमार पंजीकरण कार्य में लगे। इनके सहयोग के
लिए बीडीओ सदर साधना दीक्षित, बीडीओ उमर्दा राम उदरेज यादव को जिम्मेदारी
सौंपी गई थी। दोपहर के वक्त सदर ब्लाक में अव्यवस्था का आलम नजर आया।
रोजगार सेवक व प्रधानों ने मजदूरों के पंजीकरण में कोई खास रुचि नहीं ली।
वहीं सचिवों ने भी कम ध्यान दिया।
यही वजह रही कि निर्धारित समय तक
कन्नौज विकास खंड में मात्र 49 मजदूरों का पंजीकरण कर इनसे 4900 रुपये का
शुल्क जमा कराया गया। वहीं तिर्वा में 77 मजदूरों का पंजीकरण कराकर 7700
रुपये जमा कराए गए। श्रम विभाग की 15 योजनाओं के बारे में जानकारी देने के
नाम पर केवल पंपलेट थमा दी गई।
प्रधानों ने भी रुचि नहीं ली। सदर बीडीओ
साधना दीक्षित ने कहा कि सचिवों के पास तमाम काम हैं। इसके बावजूद अधिक से
अधिक मजदूरों को लाने का पूरा प्रयास किया गया। वहीं कम पंजीकरण होने के
सवाल पर मनरेगा के उप श्रमायुक्त ने कहा कि बीडीओ को जिम्मेदारी सौंपी गई
थी। यदि सचिवों, रोजगार सेवकों या प्रधानों ने लापरवाही बरती है तो बीडीओ
जिम्मेदार होंगे।