बीते वर्ष हसेरन ब्लाक क्षेत्र के गांव रौंसा में
युद्धस्तर पर पौधरोपण किया गया था, पर उम्मीद के अनुसार यहां पौधे सुरक्षित
नहीं रह सके। इससे लोगों में वन विभाग के प्रति नाराजगी व्याप्त है।
उच्चाधिकारियों ने पौधरोपण कराने के बाद दोबारा इलाके का भ्रमण कर जमीनी
हकीकत जांचने की जरूरत नहीं महसूस की।
ग्रामीणों ने बताया कि बीते वर्ष
140 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन विभाग ने पौधरोपण कराया था। तब खुद
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भव्य समारोह के दौरान पौधरोपण किया था। जल
पुरुष राजेंद्र सिंह राणा ने भी यहां आकर पौधे लगाए थे। तब एक लाख 12 हजार
पौधे लगाए गए थे। इनमें अर्जुन, पाकड़, नीम, बबूल आदि प्रजाति के पौधे लगाए
गए थे।
पेड़ों की देखभाल एवं सुरक्षा के लिए वन चौकी भी स्थापित की गई थी।
रेंजर दिनेश चंद्र शुक्ला, वन दरोगा महेंद्र भदौरिया, वन रक्षक रामआसरे व
रज्जन सिंह तैनात हैं। कैटल गार्ड 14 लगाए गए हैं। चार चौकीदारों की भी
तैनाती है। इतना भारीभरकम स्टाफ होने के बावजूद 25 से 30 फीसदी ही पौधे बचे
हैं। शेष लापरवाही की भेंट चढ़ गए हैं।
कहीं पानी नहीं लगने तो कहीं
अन्य कारणों से पौधे नष्ट हो गए, जबकि क्षेत्र में पानी निकालने वाले आठ
इंजन लगे हैं। क्षेत्रवासियों की मानें तो अक्सर यहां वनकर्मी मौजूद नहीं
रहते हैं, जिससे कैटल गार्ड भी ड्यूटी के नाम पर इधर-उधर घूमकर टाइम पास
करते रहते हैं।
पूर्व प्रधान पति रामरतन प्रजापति ने बताया कि पौधरोपण किया
गया, पर देखभाल में लापरवाही बरती गई। वन विभाग का स्टाफ सही से पेड़ों की
देखभाल नहीं कर पा रहा है, इसलिए हजारों की तादात में पेड़ लगाए गए पर वे
ज्यादा दिनों तक नहीं चल सके।
गांव ौंसा के राम सिंह का कहना है कि गांव के
मजदूरों से काम कराया गया था, पर उनकी मजदूरी नहीं दी गई है। विवेक सिंह
का कहना है कि सही से देखरेख न होने से अधिकतर पौधे सूख रहे हैं। आए
दिन वन विभाग का स्टाफ सिर्फ वन चौकी पर आकर खानापूरी कर लौट जाता है। वन
क्षेत्र का भ्रमण सही से नहीं होता है।
अजीत सिंह उर्फ बबलू ने बताया कि
सीएम का यह ड्रीम प्रोजेक्ट था। इसमें सरकार का काफी पैसा खर्च हुआ है।
इसके बावजूद वन विभाग ने तमाम जगह तो गड्ढे खुदवा दिए पर पौधे नहीं लगाए।
इस मामले में वन दरोगा महेंद्र भदौरिया ने कोई जानकारी नहीं दी।