दिल्ली में हुए प्लेन क्रैश में जान गंवाने वालों में पलरी निवासी
राघवेंद्र कुमार यादव भी शामिल हैं। उनकी मौत की सूचना आते ही गांव में
कोहराम मच गया। जो भी सुना उनके घर की ओर दौड़ पड़ा। बीएसएफ में इंस्पेक्टर
राघवेंद्र कुछ दिन पहले पंचायत चुनाव के दौरान गांव आए थे। ऐसे में हर कोई
उनकी बातों को याद कर बिलख पड़ता।
आर्मी में
सूबेदार पद से रिटायर हुए राघवेंद्र के चाचा परशुराम ने बताया कि दोपहर में
घटना की जानकारी मिली। दिल्ली से बताया गया कि पालम एअरपोर्ट के पास
द्वारका में शाहबाद रेलवे ट्रैक के पास बगडोला गांव में प्लेन क्रैश होने
से बीएसएफ के कई अधिकारी मारे गए हैं। उनमें राघवेंद्र भी शामिल थे।
इस
सूचना ने पूरे गांव को हिला दिया है। उन्होंने बताया कि उनके भाई भूरेलाल
अध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। भूरेलाल के बेटे राघवेंद्र कुमार यादव
की प्रारंभिक शिक्षा नरमऊ के प्राथमिक स्कूल में हुई। वृजभूषण हजेला
इंटरकालेज तालग्राम से हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा 1977 में पास की थी।
इसके बाद 1979 में एयरफोर्स में उनकी एयरमैन के पद पर नौकरी लगी थी। बाद
में वह टैक्नीशियन पद तक पहुंच गए। कई बार अच्छे कार्य के लिए उन्हें
अवार्ड देकर पुरस्कृत भी किया गया। वर्ष 2013 में स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति
ले ली थी। मई 2015 में बीएसएफ में इंसपेक्टर रैंक पर ज्वाइनिंग ली थी।
तब
से वह बीएसएफ में रहकर देश सेवा कर रहे थे। उनके परिवार में पत्नी रामश्री
के अलावा दो बेटे रोहित व मोहित हैं। दोनों ही बेटे इंजीनियर हैं, जबकि
बेटी की शादी हो चुकी है। राघवेंद्र के दो अन्य भाई राजेंद्र कुमार व
रावेंद्र भी एयरफोर्स में रहे हैं। बड़े भाई राजेंद्र विंग कमांडर पद से
रिटायर हुए हैं।
बड़े भाई राजेंद्र कुमार ने बताया कि 13 दिसंबर को
भांजी की शादी में शामिल होने राघवेंद्र कानपुर आए थे। 15 दिसंबर को वापस
गाजियाबाद चले गए। वहीं वृजभूषण हजेला इंटरकालेज के रिटायर प्रधानाचार्य
सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि स्टूडेंट लाइफ में ही वह मेधावी व टापर
विद्यार्थी रहे। सदैव गुरुजनों का आदर करते थे।
कन्नौज आने पर उनसे भी
मिलते थे। कक्षा एक से इंटर तक साथ पढ़ने वाले डा. राजेंद्र पाल ने बताया
कि दोस्त की मौत की खबर आते ही पूरे गांव में उदासी छा गई है। उनकी कमी
हमेशा खलती रहेगी। पढ़ाई के साथ ही खेलकूद में भी उनकी रुचि थी। उसने देश
सेवा करके न सिर्फ अपने गांव, परिवार बल्कि पूरे जनपद का नाम रोशन किया।
गांव की युवा पीढ़ी के लिए वह प्रेरणास्त्रोत रहे। फौजी के चचेरे चाचा
अहिवरन सिंह व टीकाराम ने बताया कि वह उनकी खेती की देखरेख करते हैं।
राघवेंद्र अक्सर त्योहार व शादी समारोह में शामिल होने आते रहे हैं। गांव
से उन्हें बेहद लगाव था। गांव आने पर वह खेतों पर अवश्य जाते थे।