प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री विजय बहादुर
पाल ने तिर्वा के माध्यमिक इंटर कालेजों में शिक्षा व्यवस्था परखने को
शुक्रवार की सुबह डीआईओएस केपी सिंह यादव के साथ दो कालेजों का आकस्मिक
निरीक्षण किया। यहां हाईस्कूल व इंटर के छात्र प्रदेश के मुख्यमंत्री व
प्रधानमंत्री का नाम नहीं बता पाए।
गर्ल्स कालेज में अंग्रेजी की एक टीचर
लिटरेचर की स्पेलिंग नहीं बता पाईं। शुक्रवार की सुबह 10 बजे
राज्यमंत्री डीआईओएस के साथ बेला रोड स्थित किसान इंटर कालेज पहुंचे, जहां
प्रधानाचार्य व दो टीचर पवन कुमार व राजेंद्र कुमार काफी विलंब से आए। सभी
कक्षाओं में छात्र संख्या काफी कम मिली।
यहां अनुशासन भी नहीं दिखाई दिया।
छात्र-छात्राएं अपनी मनमर्जी से क्लास छोड़कर आ जा रहे थे। कई टीचर
गैरहाजिर थे। डीआईओएस के पूछने पर बताया गया कि चुनाव ड्यूटी में गए हैं।
मंत्री ने जब कक्षा 10 के छात्रों से सामान्य ज्ञान के संबंध में सवाल पूछे
तो कोई छात्र जवाब नहीं दे पाया।
दूसरी क्लास में कक्षा 10 के दो छात्रों
ने सवालों के ठीक जवाब दिए। इस पर डीआईओएस ने उनसे पूछा कि यह क्लास में
पढ़ाया गया है। इस पर छात्रों का कहना था कि उन्होंने कोचिंग से सीखा है। इसके
बाद मंत्री का काफिला इंदिरा देवी गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल पहुंचा।
इस
दौरान कालेज की प्रधानाचार्या विंदेश्वरी पाठक कक्षा नौ के छात्रों को
अंग्रेजी का पाठ पढ़ा रही थीं। मंत्री ने छात्राओं से सवाल दागे तो कोई भी
छात्रा उन सवालों का जवाब नहीं दे पाई। कक्षा 10 की छात्राओं से
राज्यमंत्री ने विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री व राज्यपाल के नाम पूछे। इस पर
भी कोई छात्रा सही जवाब नहीं दे पाई।
मूल अधिकार व कर्तव्य के बारे में भी
किसी को जानकारी नहीं थी। डीआईओएस के पूछने पर प्रधानाचार्य ने बताया कि
उनके स्कूल में तीन टीचरें नियमित हैं। प्रबंधतंत्र भंग चल रहा है। यहां हर
क्लास में छात्राओं की संख्या ठीक मिली। इस दौरान कालेज में अंग्रेजी
पढ़ाने वाली एक अन्य टीचर से जब राज्य मंत्री ने इंग्लिश लिटरेचर की
स्पेलिंग पूछी तो वह सही जवाब नहीं दे पाई।
बाद में डीआईओएस ने कालेज
में मिड-डे मील की किचन को भी देखा। यहां गंदगी देख नाराजगी जताई। छात्राओं
की कापियां देखी तो पता चला कि जांच के दौरान सही का निशान लगा होने के
बावजूद भी उनमें कई गल्तियां थीं। निरीक्षण के बाद राज्यमंत्री ने
पत्रकारों को बताया कि दोनों कालेजों में शिक्षण की व्यवस्था काफी खराब
मिली है। इसके लिए डीआईओएस की ओर से प्रधानाचार्यों से स्पष्टीकरण तलब किया
जा रहा है।