शहर व कसबों में दूध की किल्लत झेल रहे लोगों को नए
वर्ष में राहत मिल जाएगी। प्रदेश सरकार की ओर से संचालित मिनी कामधेनु व
माइक्रो कामधेनु योजना के तहत 1,450 दुधारू पशुओं (गाय व भैंस) की खरीद की
जाएगी। इसके बाद दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में स्थिति काफी सुधर जाएगी।
मुख्य
पशु चिकित्साधिकारी डा. डीएन लवानिया ने बताया कि जनपद में माइक्रो
कामधेनु डेयरी योजना के तहत 40 दुग्ध डेयरी खोलने की चल रही कवायद इस साल
पूरी हो जाएगी। माइक्रो कामधेनु योजना के तहत हर डेयरी में 25 पशुओं का
पालन होगा। इसके लिए कुल 60 पशुपालकों के आवेदन बैंकों में भेजे गए हैं।
वर्ष 16 में लक्ष्य के सापेक्ष सभी 40 माइक्रो डेयरी का संचालन शुरू करा
देंगे। लाभार्थियों के चयन से लेकर बैंक में संस्तुति पत्र भेजने की कवायद
पूर्ण कर ली गई है। अब तक तीन लाभार्थियों के ऋण स्वीकृति पत्र भी बैंकों
से मिल गए हैं। इसी तरह नौ मिनी कामधेनु डेयरी योजना के तहत 450 पशुओं की
खरीद करके दुग्ध उत्पादन शुरू कराया जाएगा।
बताया कि दुग्ध उत्पादन
बढ़ने से एक ओर जहां लोगों को शुद्ध दूध मिल सकेगा, वहीं गोबर की खाद की
उपलब्धता भी बढ़ेगी। होली और दीवाली एवं अन्य त्योहारों पर शुद्ध खोया, घी,
दही, मक्खन आदि तैयार करने में आसानी रहेगी। सरायमीरा निवासी राधा रमण
डेयरी संचालक एवं जनपद स्तर पर पुरस्कार प्राप्त आशीष मिश्रा का कहना है कि
डेयरी योजना आम जनता के लिए बेहद लाभकारी है।