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Kannauj News: कर्मचारियों की कारस्तानी, मुर्दा बनाकर बढ़ाई जिंदा लोगों की परेशानी

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कन्नौज। जिले में जीते जी मरने वालों की तादाद में इजाफा हो रहा है। सरकारी कर्मचारियों की कारस्तानी उन्हें मुर्दा बता रही है। अलग-अलग मामलों में बिना मौके पर सत्यापन किए ही गलत रिपोर्ट लगाई जा रही है। बाद में जब जानकारी सामने आती है तो अफरातफरी मचती है। पिछले कुछ दिनों में सामने आए ऐसे कई मामलों ने सरकारी कर्मचारियों की कारगुजारी को उजागर किया है।
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पिछले दिनों तिर्वा तहसील क्षेत्र में ऐसे कई मामले सामने आए हैं हैं। सभी मामलों में यही सामने आया कि अलग-अलग प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने के बाद आवेदक का सत्यापन किए बिना ही उसे मुर्दा बता दिया गया। मामला उजागर होने पर आवेदक को आनन-फानन दोबारा प्रमाणपत्र जारी कर उसे जिंदा बताया गया। हैरानी यह कि बिना जांच के ही रिपोर्ट बना देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से भी परहेज किया गया। मामला स्पष्टीकरण तक ही निपट गया। चंदुआहार गांव में जिंदा वोटरों को मुर्दा बताने वाले शिक्षक के खिलाफ जरूर बीएसए ने कार्रवाई की।



इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के कलसान ग्रामसभा के भुजरिया गांव निवासी अमर सिंह किसान हैं। उन्होंने किसान सम्मान निधि के लिए आवेदन किया था। आय प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 18 दिसंबर को एक जनसेवा केंद्र पर ऑनलाइन आवेदन किया। लेखपाल ने जांच रिपोर्ट में उन्हें मुर्दा बता दिया। मामला उजागर हुआ तो बताया गया कि इसी नाम के एक व्यक्ति का निधन हो चुका है। गलतफहमी में गलत रिपोर्ट बन गई।
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इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के कलशान ग्रामसभा के नई बस्ती गांव निवासी रामसेवक (60) भी सरकारी कर्मचारियों की कारस्तानी का शिकार हो चुके हैं। जनवरी के आखिरी में तहसील से खतौनी निकलवाई तो जानकारी हुई कि जमीन ग्रामसभा के ही विसेनेपुर्वा गांव निवासी स्व रामसेवक के पुत्रों के नाम चढ़ी थी। राजस्व कर्मियों ने बिना जांच के ही उन्हें मुर्दा घोषित कर दिया। मामला सामने आने के बाद उनकी जमीन को फिर से उनके नाम पर खतौनी में दर्ज किया गया।



तिर्वा विधानसभा के बूथ संख्या 285 चंदुआहार में बड़ी संख्या में जिंदा वोटरों को मुर्दा बनाने का भी मामला सामने आ चुका है। गांव के लज्जाराम, जयपाल, राजेश, रहमत अली, रमेश अली, कंठ श्री, शाकिर अली, शमशेर, मनीष, आशिम अली, निवास अली, रिजवाना, असगरी, आबिद अली आदि को मुर्दा बताया गया। मामला उजागर हुआ तो जांच हुई। बाद में ऐसा करने वाले शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई हुई। प्रशासन ने बताया जांच में लापरवाही के दौरान यह गलती हुई थी।



तिर्वा तहसील के ही रामपुर मझिला निवासी 80 वर्षीय विद्यावती भी इसी कारगुजारी का शिकार हुई हैं। उन्हें वृद्धावस्था पेंशन मिल रही थी। 24 सितंबर 2022 को पेंशन की आखिरी किस्त आई थी। उसके बाद पेंशन बंद हो गई है। जानकारी की तो बताया गया कि सत्यापन के दौरान उनको मुर्दा घोषित कर दिया गया है। इसी आधार पर पेंशन रोक दी गई। मामला सामने आने पर पेंशन बहाल करने का आश्वासन दिया गया है।



एडीएम आशीष सिंह बताते हैं कि किसी भी काम के लिए प्रमाण पत्र या कोई भी दस्तावेज बनवाने के लिए आवेदन आने पर संबंधित कर्मचारी, लेखपाल को मौके पर जाकर सत्यापन करने के बाद ही रिपोर्ट लगानी चाहिए। कर्मचारियों के मौके पर न जाकर इधर-उधर से मिली जानकारी के आधार पर रिपोर्ट बना देने से ऐसी गलतियां होती हैं। पिछले दिनों जो भी ऐसे मामले सामने आए हैं, उनमें इसी तरह की लापरवाही बरती गई।



तिर्वा तहसील में लगातार गड़बड़ी सामने आ रही है, इसके बावजूद एसडीएम अशोक कुमार का तर्क है कि उन्हें ऐसे मामलों की जानकारी नहीं है। रामपुर मझिला निवासी 80 वर्षीय विद्यावती को मुर्दा बताने पर उनका कहना है कि कोई सामने आए तभी वह बता पाएंगे कि रिपोर्ट में क्या और क्यों लिखा गया है। ऐसे वह कुछ नहीं बता सकते हैं। उनके रहते हुए ही कई गड़बड़ियां सामने आई हैं।

बिना मौके पर जाए गलत रिपोर्ट बनाने की शिकायत मिलने पर इसे गंभीरता से लेते हुए जांच की जाएगी। लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। बिना मौके पर जाए गलत रिपोर्ट बनाना गलत और गंभीर मामला है।
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- शुभ्रांत शुक्ला, डीएम
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