बिजली बिभाग और आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे निर्माण में
लगे अधिकारियों की खींचतान के कारण क्षेत्र के डेढ़ दर्जन गांवों की बिजली
आपूर्ति तीन दिन से ठप है। वहीं कई पांच दिन तक बिजली संकट और झेलने के
आसार हैं, क्योंकि दोनों विभागों के बीच जारी तनातनी दूर होने के नाम नहीं
ले रही है।
इससे आलू, गेहूं और सरसों समेत अन्य तमाम तरह की फसल को भारी
नुकसान पहुंच रहा है। वहीं छोटे-छोटे कारखाने भी ठप पड़े हैं। इसके अलावा
बिजली कटौती से ग्रामीणों में नाराजगी भी है। ज्ञात हो कि अमोलर क्षेत्र के
दर्जनों गांवों को मतौली उप केंद्र से बिजली मिलती है।
किसान हाकिम सिंह,
केशवचंद्र, हैदर अली, सूबेदार, रामचंद्र, शिवराज सिंह, विश्वनाथ और अतर
सिंह आदि किसानों का कहना है कि मंगलवार की शाम से बिजली आपूर्ति ठप है।
इससे आलू व गेहूं की सिंचाई, बुआई नहीं हो पा रही है। उप केंद्र पर जाने पर
मरम्मत कार्य जारी होने की बात कहकर लौटाया जा रहा है।
आजकल करते-करते तीन
दिन बीत गए लेकिन बिजली गुल है। ग्रामीणों का आरोप है कि हाईवे निर्माण
में लगे अफसरों व बिजली विभाग की आपसी खींचतान के चक्कर में जनता को बिजली
संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में उप केंद्र के लाइनमैन
वीरेंद्र एवं मोहित ने बताया कि फगुहा भट्ठा के समीप हाईवे निर्माण के लिए
अंडरग्राउंड केबिल डाली गई थी। हाईवे निर्माण के दौरान 33 हजार वोल्टेज की
यह 50 मीटर केबिल कई जगह कटकर अलग हो गई है।
काफी प्रयास के बावजूद इसे
जोड़ना संभव नहीं है। जब तक नई केबिल नहीं आएगी, तब तक बिजली आपूर्ति चालू
हो सकती। मतौली उप केंद्र के जेई राजीव गंगवार का कहना है कि मेन लाइन की
साढ़े आठ लाख रुपये कीमत की केबिल हाईवे निर्माण के दौरान जगह-जगह कट कर
बेकार हो गई।
इसकी जानकारी बड़े अफसरों को दे दी गई है। हाईवे निर्माण करा
रही संस्था नई केबिल के लिए भुगतान जमा करे। तब नई केबिल मंगाकर दुबारा
डालने के बाद आपूर्ति चालू की जाएगी। बताया कि इस कार्य में कम से कम
पांच या छह दिन लग जाएंगे। फिलहाल मतौली उप केंद्र पूरी तरह से बंद है।
इससे अमोलर, बरियापुरवा, बघेलेपुरवा, बिरियाहार, अमथरा, टिकुरियन, सकरहनी,
गढ़िया, दलापुरवा, विचपुरवा, ढिपारा, राजापुरवा, दिलावरपुर, डम्मरपुरवा,
भवनियापुर, मोतीपुरवा, जलालपुर, मतौली आदि करीब 18 गांव अंधेरे में डूबे
हैं। इन गांवों में करीब 90 सरकारी व निजी राजकीय ट्यूबवेल बंद हैं।
वहीं
अमोलर में पानी की सप्लाई भी तीन दिन से बंद है, क्योंकि यहां पर बनी पानी
की टंकी नहीं भर पाई है। आपरेटर का कहना है कि जनरेटर नहीं है। इस कारण
पेयजल आपूर्ति संभव नहीं है। इससे गांव सीतापुरवा, कैथनपुरवा समेत 13
गांवों की पेयजल आपूर्ति भी बंद है।