आलू की सर्वाधिक पैदावार के लिए विश्व में विख्यात
कन्नौज जिला कम उत्पादन को लेकर जूझ रहा है। आलू किसानों की किस्मत फिर दगा
दे गई। प्रति बीघा बमुश्किल 20 से 25 पैकेट आलू निकल रहा है। शीतगृह
स्वामियों ने कोल्ड पहले भंडारित करने के लिए किसानों को योजनाएं देने का
लालच भी दे रहे हैं।
हालांकि, अभी आलू की मंडियों में कम उत्पादन के
बावजूद कोई विशेष उछाल नहीं आया है। ज्ञात हो कि सर्दी का मौसम काफी देर से
शुरू होने का खामियाजा आलू की पक्की फसल को उठाना पड़ रहा है। जिले में इन
दिनों आलू की खुदाई तेजी के साथ चल रही है।
हालात यह हैं कि प्रति बीघा
बमुश्किल 25 से 30 पैकेट आलू निकल रहा है, जबकि तमाम ऐसी भी बेल्ट हैं,
जहां पर किसानों को महज 17 से 20 पैकेटों से संतोष करना पड़ रहा है। इन
क्षेत्रों के किसानों को आलू की फसल में लगाई गई लागत भी नहीं निकल पा रही
है।
जलालाबाद के अनिल दुबे, विजय तिवारी ने बताया कि नवंबर और दिसंबर माह
में तापमान काफी अधिक रहा। जनवरी के आखिरी सप्ताह में सर्दी ने अपना कहर
बरपाना शुरू किया। इस कहर ने आलू की फसल पर सीधा प्रभाव डाला। नतीजा
आलू की फसल की बढ़ोतरी रुक गई।
हरदेपुर्वा के रामशंकर वर्मा और राधाकृष्ण
का कहना है कि आलू की फसल को लेकर किसान बेहद उत्साहित था, पर कम उत्पादन
ने उसके सारे अरमानों पर पानी फेर दिया है। उधर, किसानों का कहना है कि
पिछले वर्ष प्रति बीघा आलू का उत्पादन 40 से 45 पैकेट निकला था।
अबकी पिछले
बार की तुलना में आधा भी नहीं निकल रहा है। कहा कि यदि कन्नौज जिले में
बाहरी जनपदों का आलू नहीं आया तो शीतगृहों को भर पाना भी मुश्किल होगा।
उधर, आलू के कम उत्पादन के बावजूद अभी तक आलू मंडियों में उछाल देखने को
नहीं मिला है।
लाल आलू 450, सफेद 350 व चिप्सोना 400 से 430 रुपये प्रति
पैकेट के बीच बिक रहा है। इस बाबत किसानों का कहना है कि एक साथ शुरू
हुई खुदाई से अभी रेट में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। जानकार किसानों का
कहना है कि इस बार किसानों का तो कम फायदा होगा, पर व्यापारी मोटा मुनाफा
कमाएंगे।