फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘आत्मा का परमात्मा से मिलन ही रासलीला’

Sat, 21 Nov 2015 11:49 PM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईवे किनारे एडीओ महेशचंद्र दीक्षित के यहां चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण में पंडित वीरचंद्र त्रिपाठी ने रासलीला पर प्रवचन करते हुए बताया कि परमात्मा की जीवात्माओं के साथ मिलन ही रासलीला है।
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि रास शब्द का मूल अर्थ रस है और रस स्वरूप स्वयं श्रीकृष्णजी हैं। वंशीवादन का अर्थ बताते हुए कहा कि वंशीवादन तो नाद, ब्रह्म की उपासना है, जब तक वंशी नहीं बजेगी कृष्ण के दर्शन नहीं होंगे। वंशी श्रवण वह आनंद है जिसके सामने ब्रह्मानंद भी तुच्छ पड़ जाते हैं। इस नाद ब्रह्म के समक्ष सभी आनंद तुच्छ हैं।

गोपी शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि सभी इंद्रियों से भक्ति रस का पान करता हुआ जीव अपना स्त्रित्व या पुरुषत्व भुला दे वही गोपी है। उन्होंने कहा कि रासलीला भागवत का रस है। कहा कि पुरुष नारी का नहीं ईश्वर और जीव का मिलन है। काम प्राय: रात्रि के दूसरे पहर में सताता है।
विज्ञापन


अत: उस समय पवित्र होकर मन से रासलीला का चिंतन करोगे तो काम नहीं सताएगा, इसलिए रासलीला अनुकरणीय नहीं है, चिंतनीय है और उसका चिंतन काम नाशक है। सहायक आचार्य विनय त्रिपाठी ने वेद मंत्रों के साथ दैनिक यज्ञ कार्य कराके भक्तों में भक्ति भावना का संचार किया।

कुरावली के चंदन पारासर ने आरगन पर, पहर यादव ने ढोलक और रोहित सविता ने मंजीरा पर संगत दी। कथा के दौरान राजीव दीक्षित, जगदीश अग्निहोत्री, महेशचंद्र अग्निहोत्री, सुरेंद्र बाबू गौर, वेदप्रकाश दीक्षित, राजीव द्विवेदी, ऊषा देवी, सरोजनी देवी, उर्मिला, श्रीप्रकाश त्रिपाठी आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें