कन्नाैज। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा सरायमीरा में 12.39 करोड़ के घोटाले की भनक तक किसी को नहीं लगी जबकि हर वर्ष बैंक का ऑडिट भी होता रहा। वर्ष 2022- 23 में ऋण की रिकवरी न होने पर कराए गए स्पेशल ऑडिट में गबन का खुलासा हुआ। क्षेत्रीय प्रबंधक भी इस मामले को ठंडे बस्ते में डाले रहे। दो वर्ष बाद एसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
सदर तहसील के सरायमीरा सेंट्रल बैंक में वर्ष 2013 से लेकर 2017 तक प्रबंधक के पद पर अभय प्रताप नारायण, कुलदीप पारिख, पंकज सहारिया, शिवम दीक्षित की तैनाती रही। इनके फर्जी प्रपत्रों को लगाकर 208 किसानों को ऋण दिया गया। प्रत्येक वर्ष बैंक का अधिकारियों ने ऑडिट किया पर गबन की भनक तक नहीं लगी। किसानों को दिए गए ऋण की रिकवरी न होने पर बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्ष 2022- 2023 में सेंट्रल बैंक की शाखा सरायमीरा का स्पेशल ऑडिट करवाया। इसमें ऋण देने के नाम पर 12.39 करोड़ के गबन का मामला प्रकाश में आया। प्रपत्रों की जांच करवाई गई तो ज्यादातर खतौनी फर्जी पाईं गईं।
किसानों की कम जमीन को खतौनी में बढ़ाकर दर्शाया होना पाया गया। जमीनों को बंधक भी नहीं बनाया गया। इससे उनके कागजात पर किसानों से अन्य बैंकों से भी ऋण ले लिया। ऑडिट रिपोर्ट क्षेत्रीय प्रबंधक मोहम्मद शाहबाज आलम के पास भेजी गई। वह भी मामले को ठंडे बस्ते मेंं डाले रहे। जब मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया तो क्षेत्रीय प्रबंधक को रिपोर्ट दर्ज कराने की सुध आई। ऐसे में सवाल उठता है प्रतिवर्ष ऑडिट करने आए अधिकारी भी अपना कमीशन लेकर फर्जी रिपोर्ट लगाते रहे। ऐसे में उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। क्षेत्रीय प्रबंधक मोहम्मद शाहबाज आलम ने इस मामले में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। शाखा प्रबंधक मंजुल शुक्ला ने बताया कि अब इस मामले की विवेचना पुलिस करेगी। विवेचना में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर रिपोर्ट तैयार होगी।