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दस माह से पेंशन को भटक रहे 34 हजार वृद्ध

Fri, 06 Feb 2015 11:49 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
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सरकारी विभागों की लापरवाही से गरीबों की मदद के लिए चल रही योजनाओं की इमदाद पहुंचने का नेक काम पर भी ग्रहण लगा है। जिले के 34 हजार से अधिक बुजुर्ग लोगों को अब तक वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल सकी है। वित्तीय वर्ष 2014-15 के 10 महीने बीत गए लेकिन पेंशन के नाम पर उन्हें एक रुपया तक नहीं मिला।
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 ऐसे में आर्थिक तंगी झेल रहे बुजुर्ग बैंकों और समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।  जिले के 8 विकास खंडों की 441 ग्राम पंचायतों और तीन नगर पालिका व पांच नगर पंचायतों में 50 हजार 209 पेंशनधारक हैं। विभागीय आंकड़ों की मानें तो अब तक 15 हजार 996 पेंशनरों के खाते में ही पहली किश्त का रुपया आ सका है।

शेष 34213 वृद्ध पुरुष व महिलाएं इंतजार कर रहे हैं। रोजाना विकास भवन स्थित जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन यहां पर कोई यह नहीं बता पा रहा है कि पेंशन का रुपया उनके खाते में कब तक पहुंचेगा ? विभाग यह कहकर हाथ खड़े कर लेता है कि इस वर्ष आनलाइन खाते में रुपया पहुंचेगा। धनराशि का
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हस्तांतरण शासन स्तर से होना है। जनपद स्तर से सारी कागजी कार्रवाई पूरी करके भेजी जा चुकी है।

उधर पेंशनरों की मानें तो प्रदेश सरकार का सारा ध्यान समाजवादी पेंशन योजना पर लगा है। इसीलिए जिले के अधिकारी भी वृद्धावस्था पेंशन योजना के साथ सुस्त रवैया अपना रहे हैं। समाजवादी पेंशन योजना में अफसरों की तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि समाजवादी पेंशन योजना में 30700 लाभार्थियों को पेंशन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इसमें लाभार्थी चयन, सत्यापन, फीडिंग समेत विभिन्न कागजी कार्यवाई दिन-रात काम करके पूरी कराई गई। छुट्टी के दिन भी दफ्तर खुले। बाबू के पटल पर जाकर अफसर ने काम किया। युद्धस्तर से समाजवादी पेंशन पर मेहरबानी के फलस्वरूप अब तक 24143 लोगों के खाते में पेंशन का रुपया भी पहुंचा दिया गया है।

बुढ़ापे में दौड़ा रही पेंशन
सदर ब्लाक क्षेत्र के गांव तेजापुरवा निवासी करीब 70 वर्षीय रामेंद्री पेंशन के लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं। आंखों से कम दिखता है। जरा दूर चलने पर थक जाती हैं। पर पेंशन न मिलने की मजबूरी उसे बुढ़ापे में दौड़ा रही है। गांव की एक महिला की चिरौरी करके उसके सहारे पेंशन कार्यालय तक पहुंचीं। उन्होंने बताया कि कभी कागजों में तो कभी खाता नंबर में कमी बताई जाती है। पेंशन कब पहुंचेगी, इसका जवाब नहीं मिल रहा है। ऊपर से रुपया न आने की बात कहकर लौटाया जाता है।

किसी को कुछ नहीं पता
मानीमऊ क्षेत्र के निवासी 65 वर्षीय हरिश्चंद्र वृद्धावस्था पेंशन न मिलने से चिंतित हैं। विकास भवन में खड़े हरिश्चंद्र ने बताया कि जो कागजात मांगे गए थे उसे दफ्तर में जमा करा दिए। हर साल पेंशन आ जाती थी, लेकिन इस साल कोई अता-पता नहीं है। स्पष्ट रूप से जानकारी भी नहीं मिल रही है कि पेंशन आने में कितना समय और लगेगा ? पेंशन क्यों आई, यह भी बताने वाला कोई नहीं है। विभागीय बाबू जल्द पेंशन मिलने का रटारटाया जवाब देकर टरका देते हैं।

ॎ पहली बार ई-पेमेंट व्यवस्था लागू हुई है। पेंशन धारकों के खाते में सीधे लखनऊ मुख्यालय से भुगतान ट्रांसफर किया जाएगा। डाटा फीडिंग कराकर ब्यौरा शासन को उपलब्ध करा दिया गया है। पेंशन खाते में आने की प्रक्रिया शुरु हो गई है। एक बार हाईटेक व्यवस्था पटरी पर आने के बाद आगे से विलंब नहीं होगा।
-शैलेंद्र कुमार गौतम, जिला कार्यक्रम अधिकारी

विकास भवन जाने की सलाह दे रहे जनप्रतिनिधि
पेंशनरों की मानें तो जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर उदासीन हैं। प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य, ब्लाक प्रमुख से लेकर विभिन्न राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों के पास जाकर लोग गुहार लगाते हैं। नेता उन्हें विकास भवन जाने की सलाह देकर टरका देते हैं। जनकल्याणकारी योजनाओं में देरी का मुद्दा विपक्षी दल भाजपा, कांग्रेस, बसपा समेत अन्य दल भी नहीं बना रहे। धरना-प्रदर्शन तो दूर कोई ज्ञापन देकर अफसरों से जल्दी पेंशन भुगतान की मांग तक विपक्षी दल करता नहीं नजर आ रहा है।
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