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गांव लिया गोद, मुश्किलों में गए भूल

Tue, 14 Apr 2015 11:55 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
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आला हाकिम ने गोद लिया तो लगा वर्षों की मुराद पूरी हो जाएगी। दुख की घड़ी में उनका साथ मिलेगा। अब तक मनमानी करने वालों पर लगाम लगेगी। अनुदान ही क्यों, सरकार की हर मेहरबानी दरवाजे पर खड़ी नजर आएगी, लेकिन यह क्या। एक झटके में सारी उम्मीदें टूट गई। बारिश के बाद ओलावृष्टि ने खेत तबाह कर दिया तो आला हाकिम ने भी मुंह मोड़ लिया।
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मरहम लगाने को कौन कहे, एक बार दर्द जानने की भी जहमत नहीं उठाई। जी, हां हम बात कर रहे हैं डीएम द्वारा गोद लिए गए गांव अनौगी की। इन्होंने गांव को गोद लेने की औपचारिकता तो निभा ली, लेकिन कराह रहे किसानों की दर्दभरी दास्तां सुनने की फुरसत नहीं है। मजेदार बात यह है कि इसी ग्राम पंचायत में विधायक अनिल दोहरे का पैतृक गांव भी है। इसके बाद भी स्थिति यह है कि किसानों को अभी तक न तो सरकारी मुआवजा मिला और न ही पिछले सीजन का बीमा क्लेम।

डीएम द्वारा गोद लिया गया ग्राम पंचायत अनौगी में भवानीपुर, अनौगीखेड़ा, बदलेपुरवा, गुखरी, पछाएपुरवा, जमला, पछगुखरा, टिकैयापुरवा, गड़रियनपुरवा, बहेलियनपुरवा, खुर्रमपुरवा, ललईपुरवा, उम्मेदपुरवा, मैकूपुरवा आदि गांव शामिल हैं। भवानीपुर के ग्रामीण रामचंद्र तिवारी, महेंद्र सिंह ठाकुर, रामप्रकाश, रामलड़ैते, वीरपाल का कहना है कि भले ही उनके गांव को डीएम ने गोद लिया हो, लेकिन आपदा राहत के नाम पर समय से मदद नहीं मिली। 
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टिकैयापुरवा के हरिश्चंद्र ने कहा कि 20 बीघा गेहूं प्रभावित हुआ। लेखपाल ने उनके गेहूं के नुकसान का आकलन नहीं किया। कई ऐसे लोगों का नाम सूची में शामिल कर लिया गया है जिनका कम नुकसान हुआ है। जबकि ज्यादा नुकसान वालों को छोड़ दिया गया।

कहां से चुकाएं केसीसी का कर्जा
अनौगी ग्राम पंचायत के ज्यादातर किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड बनवा रखे हैं। रबी के सीजन में किसानों ने हजारों रुपये बैंक से लोन लेने के बाद खेतों में लागत लगाई। उन्नत किस्म का बीज खरीदा। खाद व कीटनाशक दवाएं डालीं। निजी ट्यूबवेलों से सिंचाई भी करवाई। लेकिनबारिश व ओलों ने अरमानों पर पानी फेर दिया।

अब ज्यादातर किसानों पर हजारों रुपये का केसीसी कर्जा लदा है। बैंक से कहा जा रहा है कि आगे ऋण चाहिए तो पहले पुराना रुपया जमा करें। वहीं ब्याज का मीटर तो लगातार घूमता ही जा रहा है। किसानों को यही चिंता खाए जा रही है कि आखिर अब वह केसीसी का कर्ज कहां से चुकाएंगे।

मदद में विलंब से किसान दुखी
भवानीपुर निवासी राजाराम सक्सेना ने कहा कि ढाई बीघा गेहूं की फसल थी। पानी भर जाने के बाद आंधी आने से गेहूं खेत में पलटकर नष्ट हो गया। एक भी दाना नहीं पैदा हुआ, लेकिन अभी तक लेखपाल ने उनके खेत का सर्वे नहीं किया है। मदद मिलने में जानबूझकर विलंब होने से किसान दुखी हैं।

फूटी कौड़ी तक नसीब नहीं
भवानीपुर के किसान शैलेंद्र सिंह का कहना है कि उनका दो एकड़ गेहूं काला पड़ गया है। लेखपाल ने सर्वे किया, लेकिन अभी तक फूटी कौड़ी तक नसीब नहीं हुई है। किसान क्रेेडिट कार्ड का लोन सिर पर है। इसको अदा करने की चिंता में नींद हराम है।

लेखपाल ने नहीं किया सर्वे
टिकैयापुरवा निवासी राम विलास पाल का कहना है कि उनकी पत्नी गुड्डी देवी ने लेखपाल से सर्वे के लिए कहा लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। अब तक सर्वे नहीं किया गया। उसकी सात बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। गेहूं की कटाई सिर्फ इस उम्मीद में कर रही हैं कि शायद भूसा निकल आए।

अफसरों ने नहीं दिया ध्यान
राम किशन तिवारी का कहना है कि उनका पांच बीघा गेहूं पूरी तरह से नष्ट हो गया। लेकिन मदद के नाम पर अभी तक एक रुपया भी नहीं मिला। अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। वीआईपी गांव होने का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। डीएम के गोद लेने या विधायक का पैतृक गांव होने का कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

सीसी रोड व नाली निर्माण में गड़बड़ी
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के अंदर 500 मीटर सीसी रोड बनाई गई। इसमें गुणवत्ता की धज्जियां उड़ाई गईं। नाली निर्माण भी घटिया तरीके से कराया गया। बीडीओ से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। कस्तूरबा गांधी विद्यालय से सियरमऊ रोड तक एक साल पहले गिट्टी डाली गई थी, लेकिन रोड का डामरीकरण अब तक नहीं कराया गया है। इस कारण लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मेरे पास डबल सर्किल है। अनौगी ग्राम पंचायत में 14 मजरे हैं, जिनमें सभी मजरों का सर्वे हो गया है। 10 गांवों के करीब 500 लोगों की सूची तैयार हो चुकी है। शेष चार मजरों के करीब 200 और लोगों की लिस्ट बनाने का काम चल रहा है। इस ग्राम पंचायत में करीब 700 लोगों की चेक बननी है। तहसीलदार का हस्ताक्षर होने के बाद दो-तीन दिन में चेक बांट दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भले ही किसानों को पता न हो लेकिन उन्होंने हर खेत पर जाकर सर्वे किया है।
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कन्हैयालाल वर्मा, क्षेत्रीय लेखपाल
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