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तकनीक और जैविक खाद से धान की रिकार्ड पैदावार

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खेत में धान की फसल कटवाते महेंद्र पाल। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। गुगरापुर ब्लाक के महेंद्र पाल ने दो हेक्टेयर में 165 पैकेट धान की पैदावार की है। यह रिकार्ड है। कम क्षेत्रफल में धान की अधिक पैदावार पर महेंद्र को किसान सम्मान दिवस पर प्रथम पुरस्कार दिया गया है। यह पैदावार जैविक खाद और नई तकनीक से मिली है।
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गुगरापुर ब्लाक के धीरपुर निवासी महेंद्र पाल रिटायर्ड शिक्षक हैं। कृषि विषय से शिक्षित होने से खेती की बेहतर जानकारी है। दो हेक्टेयर में धान की खेती की थी। धान की बेहतर पैदावार के लिए सबसे पहले खेत का समतलीकरण करवाया। इसके बाद गोबर की खाद का इस्तेमाल किया।
जुलाई में धान की नर्सरी तैयार की। अगस्त माह में निर्धारित दूरी पर धान की रोपाई की। नई तकनीक का इस्तेमाल कर पौध लगाई। खतपरवार समेत कीटनाशक दवा का छिड़काव किया। इससे फसल में रोग नहीं लगा। उन्होंने दो हेक्टेयर में 165 पैकेट धान की पैदावार की। यह पूरे जिले में रिकार्ड है। इससे कलक्ट्रेट परिसर में 23 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण की जयंती पर प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया है।
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एक बीघे में दो से तीन क्विंटल होती है पैदावार
आमतौर पर एक बीघे में दो से 2.5 क्विंटल धान की पैदावार होती है। महेंद्र पाल ने बेहतर सूझबूझ व समय-समय पर देखभाल से दो हेक्टेयर में 165 पैकेट धान की पैदावार कर रिकार्ड बनाया है। अब आसपास के लोग इसने खेती के नुस्खे सीखने आ रहे हैं।
मृदा परीक्षण के हिसाब से खाद का किया प्रयोग
महेंद्र पाल ने धान की फसल से पहले मृदा परीक्षण करवाया था। इसी हिसाब से खाद का प्रयोग किया। इसका उन्हें खासा फायदा मिला।
खुद का सबमर्सिबल पंप होने का भी मिला फायदा
महेंद्र पाल ने खेतों की सिंचाई के लिए सबमर्सिबल पंप लगा रहा है। धान की खेती के लिए शुरुआती समय में लगातार पानी भरा रहना चाहिए। खेत में हर समय नमी रहनी चाहिए। इससे फसल बेहतर होती है। महेंद्र पाल को खुद की सबमर्सिबल पंप होने का भी फायदा मिला।
महेंद्र पाल प्रगतिशील किसान हैं। उन्होंने जागरुकता से कम क्षेत्रफल में धान की अधिक पैदावार की है। उन्होंने जैविक खाद का प्रयोग किया। अधिक पैदावार पर सम्मानित किया गया है।
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-आरएन सिंह, उपनिदेशक कृषि।
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