कन्नौज। जिले के स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही और सुस्ती एक बार फिर उजागर हो गई है। स्वाइन फ्लू की आहट के बीच जहां सरकारी अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। वहीं निजी लैब और अस्पतालों की रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के दावों की हवा निकाल दी है।
हैरानी की बात यह है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्वाइन फ्लू और अन्य संक्रमणों की सटीक पहचान के लिए अत्याधुनिक आरटी-पीसीआर मशीन उपलब्ध है। इसके बावजूद अब तक न तो जांच शुरू की गई और न ही संदिग्धों के सैंपल लैब भेजे गए। सरकारी तंत्र का रवैया इतना ढीला है कि स्वास्थ्य विभाग की फाइलों में एक भी मरीज में स्वाइन फ्लू के लक्षण दर्ज नहीं किए गए हैं। स्थानीय स्तर पर सरकारी इलाज और जांच का आसरा टूट गया तो घबराए मरीज के परिजन उन्हें लखनऊ ले गए। लखनऊ के निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों में कराई गई जांचों में तीन मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इस खुलासे के बाद से पीड़ित परिवारों में हड़कंप है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग अब भी सब कुछ सामान्य होने का राग अलाप रहा है।
संक्रमितों के परिजन में नहीं मिले लक्षण
इत्रनगरी के तिर्वा क्षेत्र में दो महिलाओं और छिबरामऊ में मासूम के स्वाइन फ्लू की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम अलर्ट हो गई। टीम ने तीनों संक्रमितों के घर पहुंचकर परिजन से जानकारी ली। किसी में भी तेज बुखार, खांसी, गंभीर बीमारी व अन्य लक्षण नहीं मिले। इस कारण संक्रमितों के परिजन के सैंपल नहीं लिए गए। स्वाइन फ्लू के नोडल अधिकारी डॉ. आतिफ हसन ने बताया कि संदिग्ध मरीजों के सैंपल के लिए तीन कैटेगरी निर्धारित की गई हैं, जिसमें ए, बी और सी हैं। इनमें बुखार, खांसी, जुकाम, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द, अत्यधिक थकान, कमजोरी के साथ ही सांस लेने में दिक्कत व ऑक्सीजन लेवल कम होने व गंभीर रोगियों की जांच के लिए सैंपल लिए जाएंगे। संक्रमितों के परिजनों में किसी भी प्रकार के लक्षण नहीं मिले हैं।
वर्जन
स्वाइन फ्लू से घबराने की आवश्यकता नहीं है। लक्षण मालूम होने पर चिकित्सक से परामर्श लें। डॉक्टर की सलाह पर ही सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाएगा। जल्द ही मेडिकल कॉलेज की आरटी-पीसीआर मशीन चालू कराई जाएगी।
-डॉ. विकास चंद्रा, सीएमओ