कुछ वर्षों से भारतीय युवा पीढ़ी दूसरे देशों में मनाए जाने वाले पर्वों की
मुरीद होती जा रही है। विदेशों में संत वेलेंटाइन की याद में उनके नाम से
मनाए जाने वाले वेलेंनटाइन डे को भी भारतीय युवा पीढ़ी मनाने से चूकना नहीं
चाहती है, पर संडे ने वेलेंटाइन डे का मिजाज किरकिरा कर दिया है।
युवा
पीढ़ी को फरवरी का बेहद इंतजार रहता है। खास तौर से प्रेमी युगल को तो 14
फरवरी का बेहद इंतजार रहता है। इस दिन को संत वेलेंटाइन के नाम से
वेलेंटाइन डे मनाया जाता है। वेलेंटाइन डे से करीब एक सप्ताह पहले से ही
रोज डे के साथ इस त्योहार की शुरुआत हो जाती है।
हर साल 14 फरवरी को युवा
पीढ़ी एक दूसरे को गुलाब का फूल भेंट कर प्रेम का इजहार करते हैं।
वेलेंटाइन डे वाले दिन फूलों की दुकानों में भी प्रेम के प्रतीक माने जाने
वाले लाल गुलाब के फूलों के ढेर लगे रहे, पर अबकी युवा पीढ़ी इसे खरीदते
हुए नजर नहीं आई।
वजह संडे का दिन होने से कोचिंग सेंटर व स्कूल बंद होने
से छात्र छात्राओं को घरों से निकलने का बहाना नहीं मिल सका। जिससे युवा संडे के दिन को पूरे दिन कोसते रहे। शायद इसलिए फूलों की
दुकानों में गुलाब के फूल धरे रह गए। हालांकि, कई युवक-युवतियों
ने किसी न किसी बहाने से ही अपने प्रेम से मिलकर उन्हें प्रेम के प्रतीक
लाल गुलाब का फूल दिया।
उधर, दुकानदारों ने अच्छी कमाई के लिए गुलाब के
फूलों का स्टाक लगा लिया था, पर संडे का दिन होने से उनकी दुकानों पर फूल
धरे के धरे ही रह गए। दुकानदारों का कहना था कि बिक्री न के बराबर होने पर
मुनाफे की आस छोड़ लागत निकालने के लिए फूलों के दाम तक कम कर दिए। इसके
बावजूद बिक्री न के बराबर ही हुई थी, जिससे दुकानों पर रखे गुलाब के फूल
मुरझा गए। फूलों की दुकानों पर पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा।