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अजब हाल: लक्ष्य हजारों, आवेदन हुए, मंजूरी जीरो

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कन्नौज/तालग्राम। सरकार कोरोना काल में किसान व पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। जमीनी हकीकत ये है कि इन्हें लागू नहीं किया जा रहा है। ऐसा ही हाल प्रधानमंत्री पशु क्रेडिट कार्ड योजना का है। जिले में 9,740 का लक्ष्य तय है, आवेदन भी 1,188 हुए लेकिन बैंक शाखा प्रबंधकों के रुचि न लेने से एक भी आवेदन मंजूर नहीं हुए। पशु पालक बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं।
प्रधानमंत्री की यह महत्वाकांक्षी योजना है। इस पशु क्रेडिट कार्ड योजना में बिना किसी गारंटी, कम ब्याज दर पर 1.60 लाख रुपये का लोन देकर पशुपालकों को स्वावलंबी बनाया जाना है। शासन से पशुपालन विभाग को 9740 पशुपालकों को लाभ देने का लक्ष्य दिया गया है। अधिकारियों की उदासीनता इसमें आड़े आ रही है।
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यह है नियम
पशु क्रेडिट कार्ड के लिए पशुपालकों के पास कम से कम दो दुधारू मवेशी होने चाहिए। अगर वह मवेशी दूध नहीं दे रहे हैं तो बैंक क्रेडिट कार्ड स्वीकृत नहीं करेंगी। इसके अलावा कोई और शर्त नहीं रखी गई है।
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3.40 लाख रुपये पर जमीन की लगेगी खतौनी
किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर इस योजना में कम ब्याज पर ऋण का प्रावधान है। एक गाय पर 40 हजार और भैंस पर 60 हजार रुपये मिलेंगे। बिना गारंटी के 1.60 लाख रुपये तक का पशु क्त्रस्ेडिट कार्ड बनेगा। इससे अधिक 3.40 लाख पर पशुपालक को जमीन का खसरा खतौनी देनी होगी। जमीन बंधक नहीं होगी केवल सबूत के तौर पर पेश करना होगा।
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पशु पालकों ने बयां किया दर्द
फोटो-05 पशुपालक वीरेंद्र कुमार
किस्तियापुर के पशुपालक वीरेंद्र कुमार ने बताया कि तीन माह से पशु क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन पत्र जमा है। तब से आर्यावर्त ग्रामीण बैंक शाखा ताहपुर और पशु अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। अभी तक योजना का लाभ नहीं मिला है।
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सलेमपुर के प्रदीप कुमार का कहना है कि इस योजना के लिए पशुपालन विभाग ने ब्लाक तालग्राम के गांव-गांव कैंप लगाकर पशुपालकों के आवेदन पत्र भी जमा कराए गए थे। विभाग की ओर से सत्यापित कर संबंधित बैंक शाखा को भेज भी दिए गए। शाखा प्रबंधक हीलाहवाली कर रहे हैं।
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किस्तियापुर के शिवपाल सिंह ने बताया कि सरकार ने पशुपालकों की सुविधा के लिए योजना की घोषणा तो कर दी। लापरवाह अधिकारी और कर्मचारियों की वजह से योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे असमंजस की स्थिति बनी है। पंद्रह दिन से पशु क्रेडिट कार्ड के लिए दौड़ रहे हैं।
सरकार ने पशुपालकों के लिए अच्छी योजना की शुरुआत की थी। योजना के तहत वह ऋण लेकर कोई काम कर सकते थे। समय-समय पर वह बैंक को ब्याज देते रहते। 1188 आवेदन होने के बाद भी अभी तक एक ऋण स्वीकृत नहीं हुआ है। बैंकों को रिमांइडर भेजा गया है। इसके बाद भी ऋण अगर स्वीकृत नहीं होता है तो उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
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-डा. अनिल कुमार सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
उच्चाधिकारियों का कोई आदेश नहीं मिला है। अगर आदेश मिलता है तो अक्तूबर में जांच के बाद पशु क्त्रस्ेडिट कार्ड बनाएं जाएंगे। इससे पहले संभव नहीं है। बैंक शाखा में कार्य अधिक है कर्मचारी कम है।
-पीके गुप्ता, आर्यावर्त ग्रामीण बैंक शाखा प्रबंधक ताहपुर।
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