जिले के दौरे पर आए कृषि विभाग के प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद ने मंगलवार को किसानों की हकीकत जानी। फसल कटवाकर परता देखा तो उनकी आंखें खुली की खुली रह गई। एक बिस्वा में जहां 22 किलो गेहूं निकलता था वहीं इस बार सिर्फ आठ किलो गेहूं की निकल रहा है। प्रमुख सचिव ने अफसरों के साथ बैठक कर समीक्षा भी की।
ठठिया प्रतिनिधि के अनुसार प्रमुख सचिव ने जिले के अफसरों के साथ पट्टी व सत्तार गांव का निरीक्षण किया। खेतों पर जाकर बर्बाद फसलों का जायजा लिया। कई किसानों से नुकसान के बारे में जानकारी हासिल की। इस दौरान एक खेत पर एक बिस्वा क्षेत्रफल में खड़ी गेहूं की फसल को थ्रेसर से कटवाकर उसमे से निकले गेहूं की तौल कराई।
इस दौरान एक बिसवा में महज 8 किलो गेहूं ही निकले। इसकी भी क्वालिटी बेहद खराब थी। किसानों ने बताया कि एक बिस्वा में आम तौर पर 22 किलो गेहूं निकलता है। इस दौरान प्रमुख सचिव ने 238 किसानों को 1163306 रुपये की आर्थिक सहायता की चेक बांटी।
नजरापुर प्रतिनिधि के अनुसार फगुहा गांव में प्रमुख सचिव के काफिले ने चार बिस्वा खेत मे तैयार हुए गेहूं की फसल को कटवाने के बाद बंधवाया। इससे तीन गट्ठर तैयार हुए। इन तीनों गट्ठरों को थ्रेसर मशीन मे डालकर गेहूं निकालने के बाद वजन कराया। इस गेहूं का वजन मात्र 8 किलो 820 ग्राम ही निकला। नुकसान के बारे में पूछताछ के बाद सचिव जल्द ही किसानों को राहत मिलने की बात कहकर चले गए।
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सर्वे न होने की शिकायत की
ठठिया। सत्तार गांव के निरीक्षण के दौरान कई किसानों ने गांव में सर्वे न होने की शिकायत की। सर्वे न होने के कारण किसानों को राहत नहीं मिल पाई है। इस पर प्रमुख सचिव ने डीएम को निर्देश दिया कि इस गांव का भी सर्वे कराकर पीड़ित किसानों के नाम सूची में शामिल किए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन किसानों का 33 फीसदी नुकसान हुआ है उन्हें भी मुआवजा मिलेगा।
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दुखड़ा न सुनने पर मायूस हुए किसान
नजरापुर। क्षेत्र के किसान राजू, वीरेंद्र, प्यारेलाल, श्रीकृष्ण, छेदीलाल, राजाराम आदि ने कहा कि वे लोग अपना दुखड़ा प्रमुख सचिव कृषि को सुनाना चाहते थे, लेकिन वह किसानों से वार्ता किए बगैर ही चले गए। किसानों ने कहा कि अफसर जब किसानों से बात ही नहीं करेंगे तो जमीन की सच्चाई शासन तक कैसे पहुंचेगी। किसानों ने कहा कि शासन स्तर से आने वाले अफसरों को किसानों से एकांत में वार्ता करनी चाहिए ताकि वे निडर होकर सच्चाई बयां कर सके।