जिन क्षेत्रों में बिजली की सुविधा नहीं है या खेत तक
बिजली लाइन नहीं है, वहां के किसान भी आने वाले समय में खेतों की सिंचाई
कर सकेंगे। इसके लिए कृषि विभाग 74 सोलर वाटर पंप स्थापित कराने के लिए
अभियान चलाएगा। इस दौरान किसानों को सोलर वाटर पंप के फायदे के साथ ही इस
पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी की जानकारी भी दी जाएगी।
पंचायत चुनाव में
लगी सरकारी मशीनरी के अब फुर्सत में होने के बाद 31 मार्च 2016 तक जनपद
में 74 सोलर वाटर पंप स्थापित करने का लक्ष्य हर हाल में पूरा करने का खाका
तैयार किया गया है। जिले में गंगा नदी, काली नदी व ईशन नदी किनारे बसे
विकास खंड तालग्राम, कन्नौज, उमर्दा समेत अन्य ब्लाकों के कई गांवों में आज
भी विद्युतीकरण नहीं है।
ऐसी स्थिति में किसान खेतों की सिंचाई करने के
लिए डीजल चालित इंजनों का इस्तेमाल करते हैं। यह सिंचाई की व्यवस्था आर्थिक
दृष्टिकोण से महंगी साबित होती है, इसलिए अब सरकार की ओर से चलाई जा रही
सोलर वाटर पंप योजना को बेहतर ढंग से क्रियान्वित करने पर जोर दिया जा रहा
है।
आगामी तीन महीनों के दौरान आठ विकास खंडों के 504 ग्राम सभाओं में से
पात्र किसानों का चयन किया जाना है। उप निदेशक कृषि डा. राजेश कुमार
बताते हैं कि सोलर पंप किसानों के लिए बेहद उपयोगी हैं, पर जागरूकता की कमी
है। इस वजह से किसान अभी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। विभाग प्रचार-प्रसार
कराकर किसानों के भ्रम को दूर करेगा।
सोलर वाटर पंप धूप की किरणों के जरिए
चलेगा। उन्होंने बताया कि 70 किसानों के खेतों पर दो हार्स पावर क्षमता
वाला सोलर वाटर पंप लगेगा, जबकि दो किसानों के यहां दो हार्स पावर व दो
किसानों के खेत पर पांच हार्स पावर क्षमता का सोलर वाटर पंप लगाया जाएगा।
कृषि विभाग की ओर से ब्लाकों में तैनात कृषि प्रसार अधिकारी व अन्य विभागीय
स्टाफ को इस योजना के लिए किसानों का चयन करने के काम में लगा दिया गया
है। तीन हार्स पावर क्षमता वाले सोलर वाटर पंप की वास्तविक कीमत चार लाख 34
हजार रुपये है।
लाभार्थी किसान को 25 फीसदी धनराशि यानि एक लाख 17
हजार 200 रुपये अंशदान के तौर पर देने पड़ेंगे। यह धनराशि नगद नहीं, बल्कि
बैंक से डिमांड ड्राफ्ट के रूप में ली जाएगी। शेष धनराशि तीन लाख 16 हजार
800 रुपये सब्सिडी के तौर पर सरकार देगी। पांच हार्स पावर क्षमता वाले सोलर
वाटर पंप की कीमत पांच लाख 31 हजार 200 रुपये है।
इसमें 50 फीसदी कीमत
यानि दो लाख 65 हजार रुपये किसान को जमा करने पड़ेंगे। शेष धनराशि अनुदान
के तौर पर विभाग देगा।
कृषि विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण कराने वाले किसानों को ही इस योजना का
लाभ दिया जाएगा।