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शुरू हुई जांच, होमगार्डों का रोका गया मानदेय

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जिला होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय में अभिलेख खंगालते लिपिक। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। ड्यूटी के नाम पर होमगार्ड कार्यालय नोएडा में हुए करोड़ों के घोटाले के बाद जिले में भी जांच शुरू हुई है। शासन के निर्देश पर होमगार्डों को मिलने वाले अक्तूबर माह के मानदेय को रोक दिया गया है। जांच और मस्टर रोल के सत्यापन के बाद ही ड्यूटी का पैसा दिया जाएगा। शासन के इस फरमान से होमगार्ड महकमे में खलबली है। अधिकारियों से लेकर कर्मचारी कार्यालय में अभिलेख खंगालते दिखे।
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ग्रेटर नोएडा में होमगार्डों की फर्जी ड्यूटी लगाकर करोड़ों का घोटाला सामने आने के बाद अधिकारियों के होश उड़ गए। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शासन ने बुधवार को कन्नौज में तैनात 650 होमगार्ड जवानों का मानदेय रोकने के साथ ही मस्टर रोल की जांच के आदेश दिए। इससे विभाग के अधिकारियों से लेकर होमगार्ड जवान तक सकते में आ गए। जिला कमांडेंट चंदन सिंह के निर्देश पर कर्मचारियों ने जिला होमगार्ड कार्यालय में अभिलेखों को खंगालने के साथ इन्हें दुरुस्त करना शुरू कर दिया है।
शासन से आए आदेश में कहा गया है कि जवानों की जिन विभागों, थाना, चौकियों, जेल या अन्य स्थानों पर ड्यूटी लगाई गई है, वहां के विभागाध्यक्ष से मस्टर रोल को सत्यापित कराया जाए। इससे किस जवान ने कितने समय कब-कब ड्यूटी की, इसकी मुकम्मल जानकारी हो सकेगी। अगर किसी मस्टर रोल में गड़बड़ी, नष्ट या फिर अभिलेख गायब पाए गए तो शासन स्तर से कार्रवाई की जाएगी। इससे अधिकारियों से लेकर लिपिक कर्मचारियों में खौफ बना हुआ है।
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जिला होमगार्ड सहायक कमांडेंट सुभाष चंद्र ने बताया कि मस्टर रोल का मिलान करने के बाद ही होमगार्डों को अक्तूबर माह का मानदेय दिया जाएगा। इससे अभिलेखों को दुरुस्त किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट मंडल कमांडेंट को भेजी जाएगी।
ऑनलाइन ड्यूटी लगने के बाद भी होता है खेल
पहले कमीशन के फेर में अधिकारी कृपा पात्र होमगार्ड की ड्यूटी अधिक लगाते थे। इससे 2014 से शासन स्तर से साफ्टवेयर की मदद से होमगार्ड जवानों की ऑनलाइन ड्यूटी लगाई जाने लगी। इसके बाद भी अधिकारी गोलमाल कर लेते हैं। सूत्रों के मुताबिक ड्यूटी पर आमद कराने के बाद होमगार्ड विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ड्यूटी जाना बंद कर देता है। इसके बाद मस्टर रोल में ड्यूटी दिखाकर एक माह का मानदेय निकाल लिया जाता है।
साहब और लिपिक कर्मचारियों के घर में चलता है दफ्तर
शहर के पाल चौराहे के पास जिला कमांडेंट कार्यालय है। हाल में ही विकास भवन से कार्यालय यहां शिफ्ट किया गया है। कार्यालय में दो होमगार्ड चौकीदारी पर रहते हैं। सूत्रों ने बताया कि विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने आवासों पर ही कार्यालय बना लिए हैं। जरूरत पड़ने पर होमगार्ड जवानों को आवासों पर जाना पड़ता है। महिला होमगार्ड जिले के अधिकारियों से इसकी शिकायत भी कर चुकी हैं। शासन स्तर से जांच का आदेश मिलने के बाद बुधवार को कमांडेंट कार्यालय में चहल-कदमी दिखाई दी।
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