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मिलहिं न रघुपति बिनु अनुरागा...

Mon, 06 Jun 2016 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कन्नौज
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कथा का रसपान कराते पंडित रविकांत त्रिपाठी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अनुरागी भक्त केवट के बारे में पंडित रविकांत त्रिपाठी ने कहा कि केवट के जीवन में भगवान राम के प्रति अपार अनुराग है। उसी अनुराग की वजह से खुद भगवान भक्त केवट के ऊपर कृपा करने के लिए जाते हैं। शहर में चित्रकूट से पधारे पंडित रविकांत त्रिपाठी ने कहा कि  तुलसीदास बाबा ने रामचरितमानस में लिखा है। अति आन्नद उमगि अनुरागा अर्थात उसके जीवन में त्याग है। जब भगवान नाव में चढ़ने को होते हैं, तब केवट कहता है कि मै आपका सब भरम जानता हूं।
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इस पर श्रीराम कहते तू मेरा कौन सा भरम जानता है। केवट कहता है कि आपके चरण स्पर्श मात्र से ही पत्थर नारी अहिल्या के रूप में बदल गया। अगर आपने मेरी नाव पर अपने चरण रख दिए तो ये भी परिवर्तित हो जाएगी। मेरी जीविका का केवल यही एक साधन है।

तब लक्ष्मण बोले केवट मेरे भैया को केवल दशरथ नंदन समझने की भूल मत करना। वे स्वयं ब्रह्म हैं। पंडित जी कहते है कि केवट जानता था। कि वे स्वयं परमात्मा हैं, इसीलिए उसने चरण धोने की शर्त रखी। केवट चरण धोने के बाद भगवान राम, माता सीता व भाई लक्षमण को पार ले जाता है।
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पार पहुंचाने के बाद केवट भगवान से प्रार्थना करता है कि जिस तरह से आज उसने उन्हें नदी पार कराई है। उसे भी भवसागर से पार कराना। कथा श्रवण के लिए यजमान उमेशचंद्र मिश्रा, विवेक भारद्वाज, रमेश शुक्ला, मुकुल शुक्ला, सुमन गुप्ता अपनी-अपनी पत्नी सहित उपस्थित रहे।
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