कन्नौज। सहकारी समिति सचिवों की हड़ताल से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गुरुवार को खाद और बीज लेने पहुंचे किसानों को सभी 57 साधन सहकारी समितियों पर ताला लटका मिला। सुबह से शाम तक किसान समितियों के चक्कर काटते रहे और मायूस होकर लौटे। आलू और रबी फसलों की बोआई के समय पर खाद न मिलने से किसान परेशान हैं।
वेतन विसंगति, नियमितीकरण और 15 सूत्री मांगों को लेकर समितियों के सचिव और कर्मी हड़ताल पर चले गए हैं। लखनऊ में ज्ञापन सौंपकर समस्याओं से अवगत कराया। तिर्वा, छिबरामऊ, तालग्राम, सौरिख, हसेरन, उमर्दा, जलालाबाद और गुगरापुर ब्लॉक की सभी समितियों पर हड़ताल का असर दिखा। किसानों का कहना है कि वह सुबह नौ बजे से लाइन में लगे थे पर सचिव नहीं आए। समिति के गेट पर हड़ताल का पोस्टर भी नहीं चस्पा था।
इस समय जिले में आलू की बोआई अंतिम दौर में है, वहीं गेहूं और सरसों की बोआई शुरू हो गई है। ऐसे में डीएपी, यूरिया और एनपीके की सबसे ज्यादा जरूरत है। किसानों ने आरोप लगाया कि सहकारी समिति पर 265 रुपये में मिलने वाली यूरिया निजी दुकान पर 350 रुपये तक बेची जा रही है। डीएपी तो 1350 की जगह 1600 रुपये में मिल रही है।
किसान रामबाबू और विजय का कहना है कि प्रशासन को पहले से हड़ताल की सूचना थी, फिर भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। खाद न मिलने से बोआई पिछड़ रही है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि दो दिन में समितियां नहीं खुलीं तो कलक्ट्रेट का घेराव करेंगे। एआर कॉपरेटिव उदय शंकर ने बताया कि सचिवों से वार्ता की जा रही है, जल्द हड़ताल खत्म कराने का प्रयास किया जा रहा है।
जनपद में 1844 मीट्रिक टन डीएपी
आंकड़ों के अनुसार डीएपी 1844 मीट्रिक टन, यूरिया 5466 मीट्रिक टन और एनपीके 1508 मीट्रिक टन स्टॉक में है, फिर भी किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। सचिवों की हड़ताल के चलते गोदामों में भरा उर्वरक समितियों तक नहीं पहुंच रहा है। समितियों पर ताले लटके हैं और किसान निजी दुकानों पर महंगे दाम पर खाद खरीदने को मजबूर हैं। स्टॉक होने के बावजूद वितरण व्यवस्था फेल होने से किसानों में आक्रोश है।