जसोदा(कन्नौज)। गेहूं की अधिक पैदावार के लिए कृषि वैज्ञानिक ने जागरूक किया है। किसानों को समय पर सिंचाई और उर्वरक की जानकारी दी है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. वीके कनौजिया ने बताया कि समय से बोई गई गेहूं की फसल में सिंचाई व उर्वरक के प्रयोग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। पहली सिंचाई बुआई के 21 दिन बाद और 25 दिनों के अंदर कर लेनी चाहिए। इससे जड़ों का विकास बेहतर होता होता। दूसरी सिंचाई पौधे में कल्ले बनते समय 40 से 45 दिन की अवस्था पर करें। तीसरी सिंचाई तनों में गांठें बनते समय 60 से 65 दिन में करनी चाहिए। चौथी सिंचाई 80 से 85 दिन पर पौधे में बालियां निकलने पर करें।
पांचवीं सिंचाई दानों के निकलने के समय 100 से 105 दिन और अंतिम हल्की सिंचाई दानों के भरते समय 115 से 120 दिन में करनी चाहिए। गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए फसल के दौरान खेत में पर्याप्त नमी बनी रहे। बारिश या अन्य कारणों से जल भराव होने की दशा में जल निकासी अवश्य करें। पुष्प अवस्था से लेकर दाना भरते समय भूमि में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बुआई के समय आवश्यक मात्रा में नाइट्रोजन का प्रयोग यूरिया अथवा किसी अन्य नाइट्रोजन धारी उर्वरक से किया गया हो, तो पहली सिंचाई के बाद प्रति बीघा सात किलोग्राम या प्रति हेक्टेयर 85 किलोग्राम यूरिया का छिड़काव करें। इससे फसल को फायदा होगा।