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सड़कों पर सन्नाटा, बाजार बंद, घर जाने के लिए तरसे

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कर्फ्यू के दौरान जीटी रोड पर बाइक से जाता परिवार। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। कोरोना संक्रमण ने सितम मचा रखा है। रोज बड़ी तादाद में संक्रमित मिल रहे हैं। लोगों की जान जा रही है। संक्रमण के साथ ही बुखार और अन्य रोगों से मौतों के आंकड़ों से लोग दहशत में हैं। तभी 58 घंटे के कोरोना कर्फ्यू से शहरियों, कस्बे, गांवों के लोगों ने घर से निकलने में खुद परहेज किया। पुलिस के न दिखने के बाद भी गलियों, सड़कों, बाजारों में सन्नाटा रहा। वहीं दूसरे जिलों और प्रांतों से आने वालों को घर जाने वाहन के लिए तरसना पड़ा।
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शुक्रवार की रात से बंद हुआ बाजार शनिवार को नहीं खुला। जरूरी सामानों की दुकानें ही खुलीं। शहर के सरायमीरा, मकरंदनगर, कन्नौज शहर के व्यस्त बाजारों में पूरी तरह सन्नाटा रहा। पुलिस सड़क ों पर नहीं दिखी। लोगों ने खुद ही कोरोना गाइडलाइन का पालन किया। घर में समय बिताया। बाहर से आने वालों को जरूर दिक्कत हुई। यह रोडवेज बस स्टैंड तक पहुंच गए। यहां से घर जाने के लिए वाहन नहीं मिला। मदद की चाहत में घंटों धूप में खड़े रहे।
मास्क लगाकर खेतों में कर रहे काम
जलालपुर पनवारा। कोरोना का डर किसानों को भी सता रहा है। यह खेत में अकेले काम करने के दौरान भी मास्क लगाए रहते हैं। फरिकापुर के किसान रवि कुमार ने बताया कि अभी दो दिन पहले गांव के आईटीआई छात्र की कानपुर में मौत से पूरे गांव में खौफ है। ज्यादातर लोग डरे हुए हैं। पुआल का चारा ढो रहे रवि ने बताया कि पता नहीं रास्ते में कौन, कब मिल जाए। इससे मास्क लगाकर काम कर रहे हैं। वहीं जगतपुर में निजी नलकूप चला रहे किसान राकेश कुमार ने बताया कि दो दिन पहले गांव के युवक उमेश की असमय मौत से सारे गांव में दहशत है। कोरोना के डर से बच्चों को भी बिना मास्क के घर से नहीं निकलने देते हैं। सावधानी बहुत जरूरी है। किसान राजेश कुमार ने बताया कि वह खतरे से बचने के लिए खेत में अकेले काम करने के दौरान मास्क लगाए रहते हैं।
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