शहर के बीचोबीच कारखाने की वजह से छाया धुआं।
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कन्नौज। शहर में आबादी के बीच सालों से चल रहे इत्र कारखाने मुसीबत बढ़ा रहे हैं। ज्यादातर कारखानों में डेग भभका पद्धति से इत्र बनाया जाता है। भट्ठी में बड़े पैमाने पर लकड़ी और कोयला जलाया जाता है। इससे निकलने वाले धुएं से प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने दो साल पहले कारखाना संचालकों को नोटिस दिया था। हुआ कुछ नहीं।
कन्नौज के इत्र की दुनिया में धाक है। इसे बनाने की तकनीक सालों पुरानी है। भट्ठी पर डेग भभका से इत्र तैयार किया जाता है। शहर में इत्र बनाने के छोटे- बड़े तकरीबन 350 कारखाने हैं। इनमें से ज्यादातर आबादी के बीच में हैं। भट्ठी में लकड़ी और कोयला सुलगाया जाता है। धुएं से आसपास के लोग परेशान हैं। इनकी सेहत पर असर पड़ रहा है। इत्र कारोबारियों के रसूख से लोग खुलकर विरोध नहीं कर पाते हैं।
जानकारों के मुताबिक इत्र कारखानों से निकले धुएं में कार्बन मोनो ऑक्साइड और सल्फर जैसी गैसें होती हैं। यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक हैं। वहीं दो साल पहले प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने इत्र व्यवसायियों को इस मामले में नोटिस दिया था। इस पर इत्र व्यापारियों ने विभाग समेत सरकार से गैस पाइप लाइन की मांग की थी। यह पूरी नहीं हुई।