तकरीर करते अमेरिका के मौलाना शेख मो. औकल
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तीन दिवसीय जश्ने सिद्दीके अकबर के अंतिम दिन अमेरिका व अन्य देशों से आए आलिमों ने भी तकरीरें की। लोगों को इल्म हासिल कर आलिम बनने और अमल कर लाभ उठाने की हिदायत दी। सूफियों की शिक्षाओं पर जोर दिया और दुनिया में लोगों को भलाई का रास्ता दिखाने के लिए युवाओं का हौसला बढ़ाया। रविवार की देर शाम शुरू हुई आलमी सेमिनार का सुबह चार बजे दस्तार बंदी कार्यक्रम के साथ समापन हुआ।
अमेरिका की इस्लामिक संस्था एसोसियेशन आफ इस्लामिक चैरिटेबल प्रोजेक्ट (एआईसीपी) के सदर मौलाना शेख सैफुद्दीन साहब ने कहा कि मौजूदा दौर में समस्याओं के लिए दूसरों को इसका जिम्मेदार ठहराने लगते हैं। जबकि, छोटी-छोटी दिक्कतों को मामूली पहल से भी सुधारा जा सकता है। समाज की तरक्की से पहले खुद में बदलाव लाना होगा। अगर सभी लोग खुद की बुराइयों को दूर कर लें तो जमाना खुद ब खुद सुधर जाएगा।
इसी संस्था के सेक्रेटरी मौलाना शेख मो. औकल ने कहा कि इल्म को हासिल कर आलिम बनना ही जरूरी नहीं है। बल्कि इल्म को अपने जीवन में उतारकर लाभ उठाएं, तभी दुनिया व आखिरत में कामयाबी हासिल होगी। लेबनान से आए मौलाना शेख यूसुफ ने कहा कि खुद में सुधार लाने के लिए किसी अच्छे दिन या वक्त का इंतजार न करें। अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए सूफियों की हयात से सबक लिया जा सकता है।
उनके रोजमर्रा के कामों को नजीर बनाकर जिंदगी शुरू करें। इंशा अल्लाह कोई तखलीफ नहीं आएगी। सूफियों ने कभी किसी को छोटा व बड़ा नहीं समझा। बांग्लादेश से आए प्रो. सैयद डा. मो. इरशाद ने कहा कि लोगों को अपना-पराया छोड़कर इल्म व अमल की तरक्की में जुट जाना चाहिए।
इस मौके पर हैदराबाद से आए सैयद जिआउद्दीन नक्शबंदी, मौलाना मखदूम जमाली, मौलाना शाद उरफी, बंगाल से आए मुफ्ती जाकिर हुसैन, महाराष्ट्र से आए मौलाना गुलाम वारिस, अलीगढ़ से आए मौलाना गुलाम जीलानी, दिल्ली से आए मौलाना नबील अख्तर, कछोछा शरीफ से आए आलिम सैयद नूरानी मियां ने तकरीरों के जरिए सूफियों के पैगाम को बताया।