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पंजीकृत छात्र 64, मौके पर मिले सिर्फ 18

Sat, 25 Apr 2015 12:14 AM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
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लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी सर्व शिक्षा अभियान की सफलता का नमूना शुक्रवार को गोपालनगर स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में देखने को मिला। यहां पर 64 पंजीकृत बच्चों में मात्र 18 बच्चे मिले। जिनके लिए तीन अध्यापक व दो अनुदेशक शिक्षण कार्य कर रहे थे। वहीं विद्यालय का शौचालय गेट क्षतिग्रस्त था। एमडीएम चूल्हे पर बन रहा था। हेडटीचर का कहना था कि नामांकन का कार्य चल रहा है।
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सर्व शिक्षा अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने कई जतन किए थे। माह मार्च के दौरान स्कूल चलो अभियान की रैलियां निकाली व नामांकन मेले का भी आयोजन किया। इसके बावजूद भी क्षेत्र के बच्चों में शिक्षा के प्रति अलख नहीं जगा सके। शुक्रवार को कस्बे के मोहल्ला गोपालनगर स्थित विद्यालय का जब जायजा लिया गया तो यहां पर विभाग के दावों की हवा निकली मिली।

इस विद्यालय में कक्षा छह से आठ तक मात्र 64 बच्चों का ही प्रवेश हो पाया है। सिर्फ 18 बच्चे उपस्थित थे। कक्षा छह में दस में नौ, कक्षा सात में 26 के स्थान पर चार, कक्षा आठ में 28 के स्थान पर महज पांच बच्चे मौजूद थे। कक्षा सात में सहायक अध्यापक बच्चों को पढ़ा रहे थे।
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यहां पर प्रधानाध्यापक निजामुद्दीन, सहायक अध्यापक सतीश चंद्र, अनुदेशक सपना व पूनम विद्यालय में मौजूद थीं। विद्यालय का शौचालय भी खस्ताहाल दिखा। इसका गेट टूटा पड़ा था। बच्चों को दी जाने वाली पुस्तकें एक कमरे में जमीन पर बिखरी पड़ी थीं। परिचारक वीरेंद्र स्वरुप ने बताया कि नई किताबें अभी न आने से पुरानी किताबों से ही काम चलाया जा रहा है।

प्रधानाध्यापक निजामुद्दीन का कहना है कि नामांकन का काम अभी चल रहा है। बच्चों की संख्या जल्द बढ़ जाएगी। मार्च महीने में डीएम ने बीएसए रामकरन यादव और जिला पंचायत राज अधिकारी जेके केसरवानी को निर्देश दिए थे कि वे स्कूलों के शौचालयों की दशा ठीक कराएं। इसके बाद भी दोनों विभाग दो महीने से कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं।  सूत्रों की मानें तो कमोवेश यही हाल अन्य स्कूलों का भी है।

जिले में स्कूलों में कमियां होने की बात सही है। वे निरंतर व्यवस्थाएं सुधारने के प्रयास में जुटे हैं। पहले से बदलाव भी होने लगा है। अभिभावकों को भी जागरूक किया जा रहा है। शौचालयों की दशा ठीक कराने के लिए गंभीरता से प्रयास होंगे। डीपीआरओ से वार्ता कर स्थिति से अवगत कराएंगे। जरूरत पड़ी तो मुख्य विकास अधिकारी का सहयोग लेंगे। छात्र सख्या जल्द न बढ़ी तो हेडटीचर व सहायक टीचरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी करेंगे।
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--रामकरन यादव, बीएसए, कन्नौज।
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