शहर में हुए बवाल के बाद अस्पतालों में आने वाले
मरीजों की संख्या एकाएक घट गई। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने तो डर के मारे
जिला मुख्यालय आने की हिम्मत ही नहीं जुटाई।
विनोद दीक्षित सीएचसी में
स्थित महिला चिकित्सालय में सन्नाटे का माहौल रहा। प्रसव पीड़ा से परेशान
दो-तीन महिलाएं ही आईं। वहीं चेकअप कराने व टीके आदि लगवाने को महिला मरीज
नहीं आईं। डाक्टरों के कक्ष में भी बंदी जैसा माहौल रहा। फार्मेसिस्ट
जितेंद्र कटियार ने बताया कि दंगे के चलते ग्रामीण व शहर से इलाज कराने आने
वाली महिलाएं नहीं आईं।
हालांकि, अस्पताल में इलाज के पूरे इंतजाम तैयार
रखे गए। वीडीएच सीएचसी में भी बुखार, खांसी, जुकाम व अन्य बीमारियों से
पीड़ित सामान्य मरीज शनिवार को नहीं आए। एक दो गंभीर मरीज ही पहुंचे, जिनका
उपचार हुआ। फार्मेसिस्ट आरएस कमल ने बताया कि दंगे के असर के कारण ही
सन्नाटे की स्थिति रही। मात्र तीन गंभीर मरीज ही आए।
वहीं जिला अस्पताल का
भी यही हाल रहा। इमरजेंसी के तहत 20 मरीज भर्ती किए गए। वहीं ओपीडी में 66
मरीज आए, जबकि आमतौर पर रोजाना यहां ओपीडी में करीब 400 से 600 मरीज तक
दिखाने व दवा लेने आते हैं। अधीक्षक डा. सीपी सिंह ने कहा कि ग्रामीण
क्षेत्रों के लोग खौफ के चलते जिला अस्पताल कम आ रहे हैं।