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रफ्तार सुस्त, 67 फीसदी हुई धान खरीद

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मंडी समिति के धान खरीद केंद्र पर टिन शेड में जगह के अभाव में तौल के लिए खुले में लगा धान। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। जिले में धान खरीद के लिए 22 केंद्र संचालित हैं। इन पर खरीद की जा रही है। खरीद की रफ्तार बेहद सुस्त है। अब तक 3213 किसानों से दो लाख 34 हजार क्विंटल खरीद की गई है। यह लक्ष्य का 67 फीसदी है। जिले में उत्पादन के अभाव में कम किसान ही केंद्रों पर बिक्री करने पहुंच रहे हैं। इससे लक्ष्य के सापेक्ष खरीद होने की संभावना कम ही लग रही है।
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जिले में सरकारी धान खरीद की रफ्तार धीमी है। पहले हर रोज चार से पांच हजार क्विंटल खरीद हो रही थी। यह घट कर दो से तीन हजार क्विंटल पर आ गई है। केंद्र नियमित रूप से खरीद कर रहे हैं। किसान धान लेकर नहीं आ रहे हैं। इसकी वजह जिले में किसानों के पास धान का न होना बताया जा रहा है।
डिप्टी एआरएमओ सर्वेंद्र सिंह का कहना है कि दिसंबर माह में केंद्रों ने तेजी से खरीद की है। इसी का नतीजा रहा कि दो लाख क्विंटल से अधिक खरीद की जा चुकी है। एक से 20 दिसंबर तक प्रतिदिन चार से पांच हजार क्विंटल धान केंद्रों पर पहुंच रहा था। अब केंद्रों पर दो से तीन हजार क्विंटल धान पहुंच रहा है। इससे खरीद की रफ्तार कम हो गई है। अब तक जो किसान धान लेकर केंद्र पर नहीं पहुंचे, उनसे फोन के जरिए संपर्क किया जा रहा है। जिले को तीन लाख 45 हजार क्विंटल का लक्ष्य दिया गया था। इसके सापेक्ष 67 फीसदी खरीद हो चुकी है। केंद्र प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि खरीद में लापरवाही न बरतें। लक्ष्य को प्राप्त करने का हर हाल में प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जिले में धान खरीद के लक्ष्य को 75 फीसदी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
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टिन शेड में आढ़ती का कब्जा, कहां रखें धान
मंडी समिति में एनसीसीएफ के केंद्र को बाद में खोला गया है। इस केंद्र को टिन शेड में शुरू किया गया। धान की खरीद रफ्तार पकड़ने के बाद केंद्र के पास धान रखने की जगह नहीं बची है। जो किसान धान लेकर इस केंद्र पर पहुंच रहे, उनके धान को आसमान के नीचे रखा जा रहा है। एनसीसीएफ के जिला प्रभारी अनुराग सिंह का कहना है कि जब केंद्र खोला गया, उस समय एसडीएम शैलेष कुमार ने मंडी अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि जिस स्थान पर केंद्र संचालित है, वहां रखे आढ़ती के बोरों को हटवा कर जगह खाली करा दें। इसके बाद भी जगह खाली नहीं कराई गई। अब धान खरीद होने के बाद जगह नहीं बची है।
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