रामाश्रम फीडर से रेलवे ट्रैक के दूसरी ओर के एक
दर्जन से ज्यादा गांवों को बिजली आपूर्ति का लाभ अभी तक नहीं मिल सका है।
बीते महीने ग्रामीणों ने रामाश्रम आए कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह के सामने
यह समस्या रखी थी। तब उन्होंने जल्द समाधान कराने के निर्देश जिला प्रशासन व
बिजली विभाग के बड़े अफसरों को दिए थे।
इसके बावजूद अब तक स्थित जस की तस
है। सपा नेता कोची यादव ने बताया कि गांव दहिरापुर, भैंसियापुर, अमरौली,
गुरौली, रौरा, झूसीनागर, तमियामऊ, आलमपुर, मौरा, भुड़हा, मीरपुर,
गड़रियनपुरवा, अनीभोज, समियामऊ, रंपुरा, भीकमपुर, रायपुर, बल्लापुर व
मलिकपुर गांव का आधा हिस्सा रामाश्रम में बने नए बिजली फीडर से जुड़ना है।
मौजूदा समय में ये गांव समधन फीडर से जुड़े हैं, जिसकी दूरी ज्यादा है।
लंबी लाइन होने से अकसर फाल्ट होते हैं, जिसे खोजने व मरम्मत करने में
विलंब होता है। रामाश्रम फीडर बेहद नजदीक है। यदि इससे इन गांवों की लाइन
जोड़ी जाएगी तो बिजली आपूर्ति सुधर जाएगी, लेकिन इसके बावजूद रेलवे लाइन
पार करके के दक्षिणी हिस्से में स्थित गांव इस फीडर से नहीं जोड़े जा रहे
हैं।
दरवेश कुमार, धीरेंद्र सिंह, राजेंद्र, महेंद्र, रघुवीर सिंह आदि
ने बताया कि दहिरापुर का राजकीय नलकूप लो-वोल्टेज से अक्सर बंद रहता है।
इससे किसान सिंचाई संकट झेल रहे हैं। इसी तरह करीब दो दर्जन निजी नलकूप भी
बिजली कटौती व कम वोल्टेज होने से अक्सर बंद रहते हैं। मोटर भी जल्दी-जल्दी
फुंक जाती है।
ग्रामीणों ने चुनाव में इस समस्या को मुद्दा बना रखा है।
वोट मांगने पहुंच रहे नेताओं के सामने यह समस्या रखी जा रही है, तो वे
बिजली विभाग के एक्सईएन से वार्ता करके नए फीडर से गांवों को जुड़वाने की
बात कह रहे हैं। उधर, एक्सईएन विद्युत आरएन वर्मा ने बताया कि रामाश्रम
फीडर से कानपुर-फर्रुखाबाद रेलवे लाइन पार के गांवों को जोड़ने को
अंडरग्राउंड केबिल निकालनी है।
कहा कि इसके लिए रेलवे विभाग को लिखापढ़ी
की जा रही है। रेलवे से मंजूरी न मिलने से रेल पटरी के नीचे से तार नहीं
डाले जा सके हैं। उम्मीद है कि जल्द ही रेलवे की मंजूरी मिल जाएगी, जिसके
बाद जनता को बेहतर बिजली आपूर्ति दी जाने लगेगी।