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राम नाम से ही मानव उद्धार

Mon, 01 Aug 2016 12:05 AM IST
अमर उजाला/कन्नौज
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कथा सुनाते आचार्य रामबाबू द्विवेदी। - फोटो : अमर उजाला
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कस्बे के दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में चल रही श्रीराम कथा में बिल्हौर से आए आए पंडित रामबाबू द्विवेदी ने कथा के दूसरे दिन रविवार को कहा कि ब्रह्म ही निराकार है, वही साकार है। राम नाम मात्र से ही मानव तर जाता है। आचार्य मयंक जी ने नाम और रूप को ईश्वर की दो उपाधियों बताया। राम नाम का स्मरण करते ही रूप प्र्रकट हो जाता है। श्रीराम कथा में शिव महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शंकर स्वयं प्रकट हुए हैं।
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लिंग पुराण में वर्णन है कि ब्रह्मा और विष्णु में यह विवाद हुआ कि दोनों में कौन श्रेष्ठ है। इसी दौरान दोनो के बीच एक ज्योतिलिंग प्रकट हो गया और उससे ध्वनि निकली की एक व्यक्ति ऊपर की ओर जाओ व एक नीचे की ओर जाकर आदि छोर का पता लगाओ। नीचे गए विष्णु भगवान ने कहा कि मैं अंत का पता नही लगा पाया।  वहीं ब्रह्मा जी ने केतकी पुष्प एवं गाय को झूठा साक्ष्य बताकर कहा कि मैं पता लगा आया हूं।

तभी लिंग में से स्वयं शिव प्रकट हुए और विष्णु जी को श्रेष्ठ कहा और उनके झूठ बोलने पर ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि पुष्कर के अलावा तुम्हारी कहीं भी स्थापना नहीं होगी। मान्यता है कि तभी से शिवलिंग पूजा जाने लगा। उन्होंने कहा कि शिव श्रद्धा हैं तो पार्वती विश्वास हैं। दोनों के मिलन से भगवत भक्ति प्राप्त होती है। शिव, रिद्धि, सिद्धि, विद्या के अवगधउानी है। इस दौरान पं. अवधेश शुक्ला, सुभाष कटियार, अनिल दुबे, किशन तिवारी, रजनीकांत यादव, प्रदीप चंद्र पाठक आदि मौजूद रहे।
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