विकास भवन में वन विभाग द्वारा गौरैया संरक्षण एवं
संवर्धन पर जागरूकता कार्यक्रम में जिले के 18 स्कूलों के 36 टीचरों और 225
छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में गौरैया के संबंध में
गीतों के माध्यम से बच्चों को जानकारियां व उनके संरक्षण के उपाय बताए गए।
सीडीओ
उदयराज यादव ने कहा कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए मनुष्य की
संवेदनशीलता एवं भविष्य के प्रति अस्तित्व को बचाए रखने के लिए गौरैया
संरक्षण जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक छोटी सी चिड़िया गौरैया जो पूरे देश
में बड़े-बड़े झुंडों में पाई जाती थी, पर आज पेट्रोल, डीजल, कोयला जलाने
से व मोबाइल टावर के रेडिएशन से लुप्त होती जा रही है।
एक मुख्य कारण यह भी
है कि उनके घोंसला बनाने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं बचे है। कच्चे घरों
में घोंसले आसानी से बन जाते थे, पर बढ़ती आबादी के चलते शहर व कस्बों में
उपयुक्त स्थान उन्हें नहीं मिल पा रहे हैं। कहा कि प्रजनन दर कम होने के
कारण गौरैया विलुप्त होती जा रही है।
केपी सिंह यादव ने बच्चों को गीत के
माध्यम से व रामायण तथा महाभारत के ग्रंथों से उदाहरण देते हुए गौरैया के
संरक्षण में योगदान देने की अपील की। प्रभागीय वनाधिकारी ने गौरैया को
सामाजिक स्वरूप एवं परंपरा से जोड़ते हुए उसके विलुप्त होने की संख्या को
अस्तित्व के प्रति खतरे का संकेत बताया।