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प्रतिष्ठा के चक्कर में पब्लिक परेशान

Tue, 19 May 2015 11:33 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
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जिले में करीब एक माह पहले वकील और लेखपाल के बीच हुए विवाद का हल आज तक नहीं निकल पाया है। आलम यह है कि एक ओर लेखपाल संघ तो दूसरी ओर बार एसोसिएशन के सदस्य हड़ताल पर हैं। इन सबके बीच अगर कोई पिस रहा है तो वह है आम जनता। हर रोज तहसील में सैकड़ों लोग खसरा, खतौनी से लेकर आय और जाति प्रमाणपत्र के लिए परेशान हो रहे हैं।
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वहीं अतिवृष्टि और बारिश से बर्बाद हुए किसानों को आर्थिक मदद पहुंचाने का काम भी अटक गया है। राजस्व संबंधी शिकायतों में लेखपालों की जांच रिपोर्ट न लग पाने के कारण समस्याएं जस की तस पड़ी हैं। उधर प्रशासनिक अफसर भी इस समस्या को सुलझाने के लिए उदासीन रवैया अपनाए हैं।

तहसील सूत्रों की माने तो तिर्वा, सदर व छिबरामऊ में रोजाना 2 से 3 हजार लोग राजस्व संबंधी काम को लेकर पहुंचते हैं। वजीफा फार्म में लगाने के लिए जाति प्रमाण पत्र के लिए दर्जनों छात्र-छात्राएं भी यहां आते हैं। लेकिन यहां आने लोगों को लेखपालों के कक्षों में सिवाए ताले के कुछ नहीं मिलता। ऐसे में उन्हे बैरंग लौटना पड़ता है। पूछने पर कोई संतोषजनक जवाब भी नहीं मिलता। यह कहकर लौटा दिया जाता है कि हड़ताल खत्म होने का इंतजार करो।
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लेखपाल संघ के तहसील अध्यक्ष अखिलेश मिश्रा कहते हैं कि उन्हें मालूम है कि रोजाना हजारों लोग विभिन्न प्रकार के जरूरी कागजात न बन पाने के कारण परेशान हो रहे हैं। लेकिन इसके लिए लेखपाल नहीं बल्कि जिले के अधिकारी और अधिवक्ता दोषी हैं। अधिवक्ता की पिटाई की घटना के बाद फील्ड पर काम करने वाले लेखपाल भयभीत हैं। दोषियों पर कार्रवाई हो तभी लेखपाल खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे और अपना काम शुरू कर देंगे।

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना पर ब्रेक
लेखपालों की हड़ताल के कारण राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना पर भी ब्रेक लगा है। गरीबी और हादसों की मार झेलने वाले जब मदद की उम्मीद लेकर जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय या तहसीलों में आवेदन करते हैं तो आवेदन फार्म वहीं पर ठहर जाते हैं। लेखपालों की रिपोर्ट न लग पाने के कारण यही नहीं पता चल पा रहा है कि कौन पात्र है और कौन अपात्र।

मनरेगा की रफ्तार भी हुई धीमी
मनरेगा के पैरों में भी हड़ताल ने बेड़ियां डाल दी हैं। जिन ग्राम पंचायतों में चकरोड बनाने के लिए स्टीमेट बनाने की तैयारी चल रही है वहां आगे की प्रक्रिया बंद हो गई है। लेखपाल के न पहुंचने के कारण चकरोड की पैमाइश नहीं हो पा रही है। इस कारण ग्राम पंचायत के खाते में बजट होते हुए भी चकरोड पर मिट्टी डालने का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। इस कारण जॉबकार्ड धारक मजदूरों को रोजगार का अवसर भी कम मिल पा रहा है।

न्यायिक कार्य ठप, मुकदमों में बढ़ रहीं तारीख
वकीलों के हड़ताल पर होने के कारण न्यायिक प्रक्रिया ठप है। नायब तहसीलदार, तहसीलदार, एसडीएम, एडीएम से लेकर डीएम तक की कोर्ट में कामकाज नहीं हो रहा है। जमीन संबंधी मुकदमों में तारीखें लगातार बढ़ रही हैं। वादकारी जनता कई किमी के चक्कर लगाकर आती है और सुनवाई की अगली तारीख लेकर चली जाती है। इससे पीड़ितों को न्याय मिलने में विलंब हो रहा है।

वकीलों व लेखपालों से वार्ता की जा रही है। एसडीएम के जरिए भी दोनों पक्षों से बातचीत की गई है। विवाद को जल्द से जल्द समाप्त कराने के लिए प्रशासन पूरी सक्रियता से जुटा है। उम्मीद है कि एक-दो दिन के अंदर वकीलों और लेखपालों के बीच चल रहे विवाद का समाधान निकाल लिया जाएगा। ताकि जनता को विभिन्न समस्याओं से राहत मिल सके।
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अनुज कुमार झा, डीएम

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