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साहब ! जेब में पैसे नहीं न तो घर लौट सकते और न ही जा सकते दिल्ली

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सौरिख। साहब! लॉकडाउन में दिल्ली से घर लौटे थे, जो पास में था वह तीन चार महीनों में खर्च हो गया। परिवार वालों का पेट भरने के लिए किसी तरह किराए का जुगाड़ कर दिल्ली काम की तलाश में जा रहे थे। हादसे के बाद अधर में लटक गए हैं, न तो घर वापस लौट सकते हैं और न ही दिल्ली जा सकते हैं। यह गुहार थी उन एक दर्जन से अधिक यात्रियों की जो आगरा लखनऊ एक्सप्रेस पर बस हादसे का शिकार हुए थे।
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तिर्वा मेडिकल कॉलेज में उपचार के बाद एक दर्जन घायल थाने पहुंच गए और पुलिस कर्मियों के सामने अपना दुखड़ा रोया। घायल रोशन यादव का कहना था कि वह दिल्ली में वेल्डिंग का काम करता था। लॉकडाउन में घर लौट आया। स्थानीय स्तर पर काम न मिलने से मजबूरन दिल्ली लौटना पड़ रहा है। जिन पैसों का जुगाड़ किया था, उनसे बस की टिकट खरीद ली।
मुकेश पुत्र रामभरोसे ने बताया कि वह सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था। कंपनी से बुलावा आने के कारण वह वापस जा रहा था। हादसे का शिकार हुए सभी लोग मजदूर वर्ग के हैं जो दिल्ली में रोज कमाकर खाते थे। ऐसी स्थिति में अब उनके पास न तो घर लौटने का किराया है और न ही दिल्ली जाने की व्यवस्था। सभी घायलों ने थानाध्यक्ष से मदद की गुहार लगाते हुए गंतव्य तक पहुंचाने की मांग की।
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