आलू किसानों को अब गेहूं की फसल झटका देने वाली है।
मौसम में हुए बदलाव से गेहूं में समय से पहले बालियां निकलनी शुरू हो गईं
हैं, जिससे गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ेगा। साथ ही छोटे पौधों से भूसे की
भी किल्लत हो सकती है।
गेहूं की फसल की बुआई का सही समय नवंबर है, पर
आलू बेल्ट के किसान इस फसल को दिसंबर में बो पाते हैं। आमतौर पर गेहूं की
कई प्रजातियों की लंबाई 80 से 130 सेमी तक होती है और ये प्रजातियां 90 से
145 दिनों में तैयार होती हैं, पर अबकी फसल की लंबाई सिर्फ 30 सेमी ही रह
गई है और गेहूं में बालियां आनी शुरू हो गईं हैं।
अगेती किस्म के गेहूं में
भी फरवरी के प्रथम सप्ताह तक बालियां निकलती हैं, पर आलू किसान अगेती फसल
को नहीं बो पाते है। कृषि वैज्ञानिक डा. एके सिंह बताते है कि लंबाई न
बढ़ने से पत्तियां कम है। पत्तियां ही भोजन तैयार तैयार करती है, जिससे
दाना मोटा होता है, पर छोटे पौधे में सही भोजन न बनने से दाना छोटा ही रह
सकता है, जिसका असर उत्पादन पर पड़ेगा।
सबसे अच्छा गेहूं बढ़ते समय नम
और ठंडा और पकते समय शुष्क और गर्म मौसम में होता हैै। गर्म मौसम दानों के
ठीक से पकने में मदद करता है। बढ़ते समय और बाली निकलने के दौरान जरूरत से
ज्यादा उच्च तापमान या सूखे की स्थिति गेहूं के लिए हानिकारक होती है, पर
अबकी सर्दी न पड़ने से गेहूं के पौधे नहीं बढ़ पाए और बालियां निकल आई,
जिससे पैदावार में फर्क तो पड़ेगा ही भूसे की भी किल्लत हो जाएगी।
गेहूं की
फसल में बालियां आने से किसान चिंतित हैं। रेरीरामपुर गांव के किसान मनोज
पांडे ने 20 बीघा खेत में गेहूं बोया, पर खेत में गेहूं में बालियां तो आ
गईं, पर पौधों में वृद्धि हुई ही नहीं है। उनका कहना है कि इससे गेहूं का
उत्पादन कम होगा।
कुंअरपुर गांव के संजीव चौहान बताते है कि फसल में
पहले ही बालियां आ गई और बालियां भी कम आई है। बताते हैं, अगेती किस्म के
गेहूं में ही फरवरी के पहले सप्ताह में बालियां आती हैं, पर अबकी पहले
बालियां आ गईं हैं। पौधों के छोटे होने से बालियां भी बहुत छोटी लगी हैं।