पाला पड़ने के बाद शीत चलने से तापमान में आई गिरावट के कारण आलू में परपरा व झुलसा रोग लग गया है। धीरे-धीरे फसल चौपट होती जा रही है। वहीं, पाला व मौसम की मार से सर्द हवाओं के कारण बैगन की फसल प्रभावित हो रही है। कृषि वैज्ञानिक ने दवा के छिड़काव की सलाह दी है।
किसान वीरेंद्र कुमार, राम कुमार, राम निवास, ईश्वर दयाल का कहना है कि पाला के बाद तापमान गिरने से अगेती फसल में कम नुकसान हुआ है। वहीं, पिछेती आलू की फसल में झुलसा के साथ परपरा रोग फैल रहा है। फसल में दवा छिड़कने के बाद भी नुकसान होता जा रहा है। उत्पादन भी प्रभावित होगा। बादलों ने भी रुख दिखाना शुरू कर दिया है।
अगर, बारिश हो गई तो आलू की फसल तबाह हो जाएगी।
किसान महेंद्र सिंह, रामनरेश, पीयूष, रघुवीर सिंह का कहना है कि कुछ दिन पहले हल्का पाला पड़ने से बैगन की फसल के ऊपर प्रभाव पड़ा था। अब ठंडी हवाओं के चलते फूल झड़ गए हैं और फल सिकुड़ने लगे हैं। बादलों के कारण भुनगा रोग व फली भेदक का हमला तेज हो गया है। इसके साथ-साथ पाले के कारण पौधे भी मुर्झा रहे हैं। अब किसानों के सामने विकराल समस्या है। दवा आदि भी असर नहीं कर रही है।
इस समय तापमान गिरा हुआ है। पाला की आशंका है। आलू की फसल पर किसान 2.5 ग्राम मैंकोजेब व एक ग्राम कर्बिंडाजोल को मिलकर खेतों में स्प्रे करें। झुलसा रोग से बचाव होगा। स्टिक दवा अवश्य ्िमलाएं। बादल छाए हुए हैं। अगर बारिश हो गई तो दवा पेड़ पर ही बनी रहेगी। वहीं, बैगन की फसल के बचाव के लिए सिंचाई करें, खेतों में हल्की नमी बनाए रखें। - डा. अमर सिंह (कृषि वैज्ञानिक, कन्नौज)