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सपा का गढ़ ध्वस्त करने वाले असीम स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री

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कन्नौज सदर विधानसभा से पहली बार चुनाव जीतने वाले पूर्व आईपीएस असीम अरुण ने ली स्वतंत्र प्रभार मं? - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। सपा के गढ़ को ध्वस्त करने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण को प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार का तोहफा मिला है। अमीम जिले से पांचवें ऐसे विधायक हैं, जिन्हें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। इत्र नगरी के लोगों में आशा जगी है कि अब जिले में विकास कार्यों की रफ्तार और तेज होगी।
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1993 में छिबरामऊ विधानसभा सीट से विधायक रामप्रकाश त्रिपाठी भाजपा-बसपा के गठबंधन वाली सरकार में राज्यमंत्री बने थे। इसके बाद सदर विधानसभा सीट से विधायक बिहारी लाल दोहरे 1985 में केबिनेट स्वास्थ्य मंत्री बने थे। ऐसे में 36 साल बाद सदर सीट से असीम अरुण को मंत्री पद मिला है। 2012 में तिर्वा विधानसभा सीट से विधायक विजय बहादुर पाल सपा सरकार में शिक्षा मंत्री रहे थे। 2017 में छिबरामऊ सीट से विधायक चुनी गईं अर्चना पांडेय को भी राज्यमंत्री पद से नवाजा गया था।
1994 बैच के आईपीएस अधिकारी
असीम अरुण का जन्म तीन अक्तूबर 1970 को बदायूं जनपद में हुआ था। उस समय उनके पिता श्रीराम अरुण बदायूं के पुलिस कप्तान थे। इसके बाद वे दो बार प्रदेश के डीजीपी भी रहे। असीम अरुण 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। मौजूदा समय में असीम अरुण की बहन रश्मि अरुण शमी मध्यप्रदेश में शिक्षा प्रमुख के पद पर तैनात हैं।
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कनाडा से किया परास्नातक
खाकी से खादी पहनकर मंत्री बने असीम अरुण ने लखनऊ के सेंट फ्रांसिंस कॉलेज से शिक्षा शुरू की थी। उच्च शिक्षा के लिए वे दिल्ली पहुंचे और यहां सेंट स्टीफेंस कॉलेज से बीएससी की। इसके अलावा कनाडा से परास्नातक किया है। लंबे समय तक पुलिस सेवा के बाद वीआरएस देकर पहली बार चुनाव जीतें और राज्यमंत्री तक का सफर तय किया।
जज्बा और बहादुरी से खूब रचे इतिहास
असीम अरुण, हाथरस, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, आगरा, अलीगढ़, गोरखपुर, कानपुर और लखनऊ में पुलिस अधिकारी के पद पर तैनात रहे। लखनऊ में एटीएस में रहते हुए उन्होंने ठाकुरगंज इलाके में आतंकी सैफुल्ला को मार गिराया था। 2009 में उन्होंने अमेरिका पुलिस की तर्ज पर पहली बार अलीगढ़ में स्वाट टीम गठित की थी। 112 डायल पुलिस सेवा में उन्होंने रहकर कई ऐतिहासिक कार्य किए हैं।
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