सहारनपुर की टेनरियों से निकलने वाले दूषित पानी की वजह से काली नदी का पानी जहरीला हो गया है। जलीय जीव मर रहे हैं। तटवर्ती गांवों के लोग नदी में मवेशी ले जाने से कतरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस पानी से खेतों में सिंचाई भी नहीं हो पा रही है।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से निकली काली नदी 350 किलोमीटर का लंबा सफर तय करने के बाद कन्नौज में गंगा नदी में मिल जाती है। इसे गंगा की सहायक नदी इसलिए कहा जाता है कि इससे लाखों हेक्टेयर भू-भाग सिंचित है। यह नदी सहारनपुर के औद्योगिक क्षेत्र से भी निकलती है, जिससे टेनरियों का दूषित पानी इसमें मिल जाता है। पानी में आक्सीजन की मात्रा कम होने के कारण जलीय जीव भी लगातार मर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अब तो नदी का पानी सिंचाई के काबिल भी नहीं रहा। क्षेत्र में यह दलीपपुर, मेरापुर गढ़िया, कुंवरपुर करनौली, नगला भौसे, मनिकापुर, उधरनपुर, अनबोला, जसुआमई सहित कई गांवों से होकर गुजरी है।