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29 से नवरात्र, बाजारों में खरीदारों की धूम

Mon, 27 Mar 2017 12:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
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पंडित पवन शुक्ला। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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चैत्र नवरात्र 29 मार्च से शुरू हो रहे हैं। घरों में तैयारियां जोरों पर हैं। बाजारों में नवरात्र के लिए फलों व सिंघाड़ा, कुटू, मखाना आदि की मांग बढ़ने लगी है। मां दुर्गा के वस्त्रों से लेकर पूजन की सामग्री भी बिकने लगी है। वैदिक आचार्य पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 29 मार्च दिन बुधवार को सुबह 08 बजकर 26 मिनट से 10 बजकर 24 तक है। चैत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों के साथ ही हिंदू नवसंवत्सर शुरू होता है इसलिए इस नवरात्रि का काफी मान है। इस साल 29 मार्च से शुरू होने वाला यह नवरात्र छह अप्रैल तक चलेगा।
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दुर्गा सप्तशती के पाठों से पूर्ण होती मनोकामना
1- प्रथम अध्याय का पाठ करने से चिंता व तनाव दूर होगा।
2- द्वितीय अध्याय का पाठ करने से मुकदमे, वाद व भूमि आदि से संबंधित मामलों में विजय मिलेगी।
3- तृतीय अध्याय का पाठ करने से शत्रुओं का दमन होगा।
4- चतुर्थ अध्याय का पाठ करने से आत्मविश्वास व साहस में वृद्धि होगी।
5- पंचम अध्याय का पाठ करने से घर व परिवार में सुख शांति बनी रहती है।
6- छठे अध्याय का पाठ करने से मन का भय, आशंका व नकारात्मक विचारों में कमी आएगी।
7- सप्तम अध्याय का पाठ विशेष कामना की पूर्ति के लिए किया जाता है।
8- अष्टम अध्याय का पाठ करने से पति-पत्नी का तनाव समाप्त होता है एवं मनचाहे साथी की प्राप्ति होती है।
9- नवम अध्याय का पाठ करने से परदेश गया व्यक्ति या खोया हुआ व्यक्ति शीघ्र लौट आता है।
10- दशम अध्याय का पाठ करने से पुत्र की प्राप्ति होती है एवं मान-सम्मान में वुद्धि होती है। व्यवसाय में प्रगति होती है।
श्री आचार्य ने बताया कि व्यापारी वर्ग को दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करना चाहिए। इससे उसके व्यवसाय में प्रगति होती है। जो लोग घर की कलह से परेशान है एवं किसी काम में प्रगति नहीं हो रही है, ऐसे लोगों को द्वादश अध्याय का पाठ करना चाहिए, इससे लाभ होगा। त्रयोदश अध्याय का पाठ करने से घर का वास्तु दोष, मानसिक क्लेश, परिवार की प्रगति में आ रही बाधा दूर होती है।

नवरात्र में क्या करें
बताया कि इन नवरात्रों में व्रत कर रहे लोगों को प्रतिदिन मंदिर जाना चाहिए व देवी को प्रतिदिन जल अर्पित करना चाहिए। वेदानुसार व्रत कर रहे लोगों को इन दिनों नंगे पैर रहना चाहिए। भक्तों को अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए। अष्टमी व नवमी को मां का विशेष शृंगार करना चाहिए और कन्याओं को भोजन कराना चाहिए। पूरे व्रत के दौरान मां दुर्गा की अखंड ज्योति जलानी चाहिए।
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नवरात्रि में क्या न करें
भक्तों को व्रत के दौरान नौ दिनों तक नाखून, सेविंग व बाल नहीं कटवाने चाहिए। छौंक, बघार न लगायें और इन दिनों में भोजन मेें लहसुन व प्याज का सेवन बिल्कुल न करें। भक्तों को इन दिनो छल, प्रपंच व झूठ से दूर रहना चाहिए। किसी को अपशब्द न कहें और इन दिनों में किसी स्त्री के साथ संसर्ग न करें, और नौ दिनों तक बिस्तर त्याग कर भूमि पर शयन करें।
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