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पितृ पक्ष आज से, दोष से बचने को किया जाता श्राद्ध

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छिबरामऊ(कन्नौज)। पितृ पक्ष आज से शुरू हो रहा है। हिंदू ज्योतिष के अनुसार पितृ दोष को सबसे जटिल कुंडली दोषों में से एक माना जाता है।
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शक्ति पीठ गमा देवी मंदिर के पुजारी पंडित बनारसी दास शास्त्री ने बताया कि हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद श्राद्ध करना आवश्यक है। मृत व्यक्ति का श्राद्ध व तर्पण न किया जाए तो उसकी आत्मा भटकती रहती है। उन्होंने बताया कि पितृ पक्ष दो सितंबर से शुरू हो रहे हैं। 17 सितंबर तक पितराें का विसर्जन होगा। उन्होंने बताया कि रक्त संबंधियों को जलांजलि दी जाती है। स्त्री भी अपने पति को जलांजलि दे सकती है। प्राणी मात्र की तुष्टि के लिए जलांजलि दी जाती है। गुरु, गुरु की पत्नी व सम्मानित व्यक्तियों को भी जलांजलि दी जा सकती है। उन्हाेंने बताया कि पुरुष को जलांजलि देते समय तस्मै सुधा नम: व स्त्रियों को जलांजलि देते समय तस्या सुधा नम: का जाप किया जाता है।
पितर धरती पर आकर देते हैं आशीर्वाद
शक्ति पीठ गमा देवी मंदिर के पुजारी पंडित बनारसी दास शास्त्री बताते हैं कि पितृ पक्ष में पितर धरती पर आकर आशीर्वाद देते हैं। यह पशु-पक्षियों के माध्यम से हमारे पास आते हैं। इन्हीं के माध्यम से भोजन ग्रहण करते हैं। इसलिए पितृ पक्ष में पशु-पक्षियों की सेवा करना जरूरी है।
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मृत्यु की तारीख न मालूम होने पर कैसे करें श्राद्ध
अगर किसी को अपने पूर्वज की मृत्यु की तिथि न मालूम हो तो श्राद्ध करने के लिए पुराणों के अनुसार पुरुषों के लिए अमावस्या व स्त्रियों के लिए नवमी की तिथि निर्धारित की गई है। पंडित बनारसी दास शास्त्री का कहना है कि अगर किसी के पूर्वज दुर्घटना में मरे हों और उसे उनकी तिथि न मालूम हो तो उसे चतुर्दशी को जलांजलि देनी चाहिए।
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