सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव हो या मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अथवा सांसद डिंपल यादव। सपा का समूचा घराना कन्नौज से दिली लगाव होने की दुहाई देता है। यहां से इनका जनप्रतिनिधित्व भी है। रविवार को संकिसा आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर कन्नौज से आगाध प्रेम की दुहाई दी लेकिन इसी वीआईपी जिले में एक गांव ऐसा भी है, जहां कोई अपनी बेटी का ब्याह नहीं करना चाहता।
वजह आधारभूरत सुविधाएं का न होना है। ऐसे में इस गांव के तमान नौजवान बिन ब्याहे हैं। लोग रिश्ता लेकर आते हैं। गांव की समस्याएं देखकर फिर लौटने का भरोसा देते हैं, लेकिन लौट कर आते नहीं। तालग्राम ब्लाक में ईशन नदी के पास बसे कुढरी गांव में डीएम से लेकर सीएम तक की निगाहें नहीं पहुंची हैं। ऐसे में यहां से बच्चे लालटेन के सहारे पढ़ते हैं तो दहेज में मिला पंखा भूसे के घर में रखा है। पेश है गांव की हकीकत बयां करती एक रिपोर्ट:
दवा तो खरीदा, अब बिजली कहां से लाएं
ईशन नदी के तट पर बसे कुढरी गांव में प्रवेश करते ही चारों तरफ बदहाली नजर आती है। करीब 1150 की आबादी वाले इस गांव में पहुंचने के लिए पगदंडी का सराहा है। गांव में पहुंचते ही सामने पड़ते हैं बुजुर्ग रामचंद्र। करीब 75वर्षीय रामचंद्र कई दिनों के बाद हुई धूम सेंकने के लिए बाहर चारपाई पर बैठे मिले।
गांव के हालचाल पर बात चली तो उनका दर्द छलक पड़ा। बोले दवा तो बाजार से लाते हैं। बताओ बिजली कहां से खरीदें। बिजली न होने के किस तरह की दिक्कतें हो रही के सवाल पर रामचद्र फिर कांपती हुई आवाज में बोलते हैं। देखो दिन में तो दवा खा लेते हैं।
डाक्टर ने कहा कि रात 10 बजे भी दवा खानी हैं। बिजली न होने से घर में अंधेरा रहता है। टटोल कर दवा खाने की कोशिश करती हैं। इस दौरान अगर दवा नीचे गिर गई तो उसका मिलना संभव नहीं होता है। वह दूसरी समस्या गिनाते हुए कहते हैं कि बेटे के ब्याह में पंखा मिला था।
उम्मीद थी कि गांव में बिजली आएगी और पंखे का मजा लेंगे, लेकिन यह सपना टूटता नजर आ रहा है। वह इस उम्र की सीमा पर पहुंच गए हैं कि कभी भी भगवान को प्यारे हो सकते हैं। चुनाव के समय नेताजी ने भरोसा दिया था लेकिन कुछ नहीं हुआ। गांव के तमाम लड़के जवान हैं। नाते रिश्तेदारों के साथ लड़की वाले आते हैं।
गांव की समस्या देखकर एक बार गए तो फिर लौटकर नहीं आते। रामचंद्र पलट कर सवाल करते हैं कि बेटा तुम्ही बताओ, आजकल की पढ़ी-लिखी लड़की क्या हमारे इस गांव में रहने आएगी? रामचंद्र की तरह ही तमाम ग्रामीणों का यही सवाल है। इस गांव का विकास न होने की वजह से शादियां रूकने लगी हैं।
बिजली ही नहीं यहां तो पीने का शुद्ध पानी और स्कूल भी नहीं है। रामचंद्र के घर के आगे मिलते हैं बुजूर्ग महावीर। कहते है ंकि शौचालन के नाम पर ढिंढोरा पीटा जा रहा है, लेकिन हमारे गांव में तो खेत में जाना मजबूरी है। सभी लोग खेतों में शौच जाते हैं। जल निगम के चार-पांच हैंडपंप ही लगे हैं, जिससे पानी की भीषण समस्या है।
गर्मी आएगी तो पानी के पानी भी मयस्सर नहीं होगा। ऐसे में कौन अपनी बेटी इस गांव में ब्याहेगा? वह बताते हैं कि उनके बड़े बेटे के विवाह में कई ऐसा सामान उपहार में मिला, जो बिजली चालित था। लेकिन यह सारा सामान रखे हुए खराब हो गया। महावीर की तरह की अन्य ग्रामीण भी परेशानी भरा सवाल करते हैं।
कहते हैं कि अब तो गांव के युवकों को शादी ब्याह के लिए अपना ठिकाना भी बदलना होगा। ग्रामीणों की मानें तो गांव में करीब 150 लोग ऐसे हैं, जिनकी उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच है। ये लोग शादी करना चाहते हैं, लेकिन गांव की बदहाली की वजह से कोई अपनी बेटी इस गांव में ब्याहना नहीं चाहता है।
जॉबकार्ड के नाम पर होती है वसूली
ग्रामीण रामनरेश, ज्ञान सिंह, रामानंद, राधेश्याम, सतीश चंद्र, मनोज, जीवालाल, चंद्रपाल, रामकिशोर का कहना है कि प्रधान व सचिव ने मनरेगा के जाब कार्ड बनाने तक में लोगों से 900 रुपये प्रति व्यक्ति अवैध वसूली की गई। राम नरेश काम करता है तो उसका भुगतान उसके भाई कल्याण सिंह के खाते में पहुंचता है।
मजदूरी का भुगतान भी कम निकलता है। कुछ दिन पहले आधार कार्ड बनवाने के एवज में प्रति व्यक्ति 50 रुपये सुविधाशुल्क के तौर पर जमा कराए गए हैं। परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र व अन्य कागजात लेने के बदले सचिव चक्कर कटवाते हैं। गांव के अंदर तो सचिव झांकने भी नहीं पहुंचते है। जब ग्रामीणों को जरूरत पड़ती है तो उनकी खोजबीन करनी पड़ती है।
क्या कहते हैं ग्रामीण
13- जागेश्वर
ग्रामीण जागेश्वर दयाल का कहना है कि गांव में सरकारी या प्राइवेट कोई भी स्कूल नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्र तक नहीं खुला है। बच्चे डेढ़ किमी दूर खबरामऊ व साढ़े तीन किमी दूर ताहपुर गांव का चक्कर लगाने के लिए मजबूर हैं। गांव के करीब 10 फीसदी लोग तालग्राम, तिर्वा, कन्नौज व गुरसहायगंज कसबों के अलावा कानपुर शहर में जाकर बस गए हैं।
15-राजाराम
बुजुर्ग राजाराम कहते हैं कि बिजली न होने की वजह से ट्रैक्टर के जरिए लोग मोबाइल फोन चार्ज कराते हैं। बीते साल बिजली को लेकर लोगों ने आक्रोश जताया। पोलियो टीकाकरण अभियान का बहिष्कार किया। फिर भी कुछ नहीं हुआ। अब विवशता यह है कि टीकाकरण न कराए तो भी नुकसान तो अपना ही है।
16- रतीराम
बुजुर्ग रतीराम ने बताया कि गांव में करीब 57 लोग 30 से लेकर 80 वर्ष तक की उम्र के पड़ाव पर पहुंच गए पर उनकी शादी नहीं हुई। 21 से 30 साल तक के करीब सौ युवक दुल्हन मिलने का इंतजार कर रहे हैं। गांव के ज्यादातर लोग अपनी पुरानी रिश्तेदारी में भी जुगाड़ फिट करके शादियां करने को मजबूर हैं। अब तो रिश्तेदार भी कन्नी काटने लगते हैं। इस गांव की बेटियों की शादी में भी अड़चन उत्पन्न हो रही है। अक्सर लड़के वाले गांव की दुर्दशा देखकर लौट जाते हैं। गांव में कोई सार्वजनिक बारात घर भी नहीं बना है।
17- सूरज प्रसाद
ग्रामीण सूरज प्रसाद का कहना है कि अब तक दर्जनों प्रधान हुए, लेकिन किसी ने बिजली पर ध्यान नहीं दिया। खेतों की पगडंडी से होकर आने-जाने की मजबूरी है। अधिकारी तो यहां झांकने तक नहीं आए। जनप्रतिनिधियों के चेहरे सिर्फ चुनाव के वक्त ही नजर आते हैं। उन्हें भी विकास कार्यों से कोई लेना-देना नहीं है।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
एक गली में खड़ंजा बिछवाया है। बाकी कोई काम नहीं कराया। अब कुड़री को लोहिया गांव के रूप में चयन कराकर काम कराया जाएगा। खबरामऊ से सिंहनापुर तक रोड मंजूर हो गई है, जो कुड़री गांव होकर निकलेगी। अन्य जानकारी बीडीओ और सीडीओ को है।
- राम आसरे यादव
प्रधान पति